उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
चाणक्य नीति में मित्रों की पहचान और उनके साथ व्यवहार पर विशेष जोर दिया गया है। चाणक्य कहते हैं कि मित्र वह नहीं जो सिर्फ मीठी बातें करे, बल्कि वह है जो मुश्किल में साथ दे और आपके हित की बात करे।आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी प्राचीन काल में थीं। उन्होंने जीवन की हर छोटी-बड़ी समस्या का सटीक समाधान दिया है। चाणक्य नीति में मित्रों की पहचान और उनके साथ व्यवहार पर विशेष जोर दिया गया है। चाणक्य कहते हैं कि मित्र वह नहीं जो सिर्फ मीठी बातें करे, बल्कि वह है जो मुश्किल में साथ दे और आपके हित की बात करे। लेकिन कुछ मित्र ऐसे भी होते हैं, जो ऊपर से मीठे दिखते हैं, पर अंदर से जहर की तरह घातक होते हैं। इनसे दूरी बनाना ही जीवन की रक्षा है। आइए जानते हैं चाणक्य की इन नीतियों का सार और इनके पीछे छिपा गहरा अर्थ।ऐसे मित्र जहर के समान हैं
चाणक्य नीति के दूसरे अध्याय के पांचवें श्लोक में कहा गया है:
‘परोक्षे कार्यहन्तारं प्रत्यक्षे प्रियवादिनम्।
वर्जयेत्तादृशं मित्रं विषकुम्भं पयोमुखम्॥’
अर्थात जो मित्र आपकी पीठ पीछे आपके कार्यों को बिगाड़े और सामने आने पर मीठी-मीठी बातें करे, ऐसे मित्र को विष से भरे घड़े के समान त्याग देना चाहिए, जिसका मुंह तो दूध से भरा हो पर अंदर जहर हो। ऐसे मित्र आपके विश्वास का दुरुपयोग करते हैं और सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं।
पीठ पीछे बुराई करने वाले मित्रों की पहचान
चाणक्य कहते हैं कि सच्चा मित्र वही है जो आपकी अनुपस्थिति में भी आपका भला चाहे। लेकिन कई लोग ऐसे होते हैं जो आपके सामने चापलूसी करते हैं और पीठ पीछे अफवाहें फैलाते हैं या आपके कार्यों में रुकावट डालते हैं। ऐसे मित्र आपके व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं। चाणक्य की सलाह है कि इनकी पहचान होते ही दूरी बना लें, क्योंकि ये जहर की तरह धीरे-धीरे आपके जीवन को खोखला कर देते हैं।
‘न विश्वसेत् कुमित्रे च मित्रे चाऽपि न विश्वसेत्।
कदाचित् कुपितं मित्रं सर्व गुह्यं प्रकाशयेत्॥’
अर्थात ना तो खोटे मित्र पर विश्वास करना चाहिए और न ही सच्चे मित्र पर पूरी तरह आंख बंद करके भरोसा करना चाहिए। क्योंकि कभी-कभी सच्चा मित्र भी क्रोध या मनमुटाव में आपके सारे राज खोल सकता है। चाणक्य की यह बात आज भी प्रासंगिक है। कई बार सबसे करीबी व्यक्ति ही सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा देता है, क्योंकि वह आपके कमजोर पक्षों से अच्छी तरह वाकिफ होता है।मित्र ही क्यों बन जाते हैं सबसे बड़ा खतरा? चाणक्य कहते हैं कि बड़े-बड़े अपराधों के पीछे अक्सर परिचित या मित्र ही होते हैं। जब कोई व्यक्ति आपका बहुत करीबी बन जाता है, तो आप भावुक होकर उसे अपने सारे भेद बता देते हैं। घर के सदस्य जैसा मानकर आप उस पर पूरा भरोसा कर लेते हैं। लेकिन जब कभी मनमुटाव या स्वार्थ की बात आती है, तो वही मित्र आपके मर्मस्थलों पर प्रहार करता है। यही कारण है कि चाणक्य ने कहा है कि मित्र पर भी आंख बंद करके विश्वास ना करें।इन मित्रों से दूरी बनाकर रखने में ही भलाई,चाणक्य की नीति हमें सिखाती है कि मित्र चुनते समय सावधानी बरतें। जो व्यक्ति आपके सामने प्रिय बोलता है लेकिन पीठ पीछे बुराई करता है, उसे जहर के घड़े के समान त्याग दें। साथ ही सच्चे मित्र पर भी थोड़ा संयम रखें। अपने भेद सबके सामने न खोलें। आज के समय में भी यह नीति बहुत उपयोगी है। रिश्तों में विश्वास जरूरी है, लेकिन अंधा विश्वास खतरनाक हो सकता है। इन बातों का ध्यान रखकर आप अपने जीवन को सुरक्षित और सुखमय बना सकते हैं।चाणक्य की ये बातें हमें सिखाती हैं कि सच्चा मित्र वही है जो आपके हित में सोचे, न कि जो सिर्फ मीठी बातें करे। ऐसे लोगों से दूरी बनाकर रखें, जिनका व्यवहार विष के समान हो। जीवन में सफलता और शांति तभी मिलती है, जब हम सही लोगों को चुनते हैं और गलत लोगों से दूर रहते हैं।
