उत्तराखंड डेली न्यूज़: ब्योरो

कहते हैं कि इस मंदिर की गुफा में स्वर्ग, नरक, मोक्ष और पाप के चार द्वार हैं. पाप द्वार बंद हो चुका है. गुफा के प्रवेश द्वार पर ही शेषनाग की आकृति है. माना जाता है कि उसके फन पर धरती टिकी है.पाताल भुवनेश्वर मंदिर की गुफा में हर चट्टान और उस पर प्रतिबिंबित हर आकृति एक कहानी कहती है, जो हमें अपनी प्राचीन संस्कृति, मान्यताओं और प्राकृतिक चमत्कारों से इंसान को जोड़ती है. पाताल भुवनेश्वर मंदिर में आप खुद को ब्रह्मांड के रहस्यों को करीब से महसूस करते हैं. यह सदियों से चली आ रही मान्यताओं और रहस्यों का संगम है।इस गुफा के भीतर के तापमान में भी एक रहस्यमय स्थिरता बनी रहती है. चाहे बाहर कितनी भी गर्मी या ठंड क्यों न हो, इस पर वैज्ञानिक शोध जारी है. उत्तराखंड की शांत पर्वतों में स्थित पाताल भुवनेश्वर, केवल एक गुफा मंदिर नहीं है, बल्कि यह सनातन धर्म के गहरे रहस्यों, प्राचीन मान्यताओं और अद्भुत कहानियों का एक जीता-जागता प्रमाण भी है. राज्य के पिथौरागढ़ जिले में गंगोलीहाट से करीब 14 किलोमीटर दूरी पर स्थित यह भूमिगत मंदिर, अपनी प्राकृतिक संरचना और उससे जुड़ी पौराणिक कथाओं के लिए दुनियाभर में फेमस है.
