उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो

ऋषिकेश में वन भूमि पर निवासरत हजारों परिवारों ने भूमि स्वामित्व की मांग को लेकर विशाल महारैली निकाली। आईडीपीएल मैदान से तहसील तक निकली इस रैली में हजारों लोग शामिल हुए, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं थीं। प्रभावित परिवारों ने अपनी भूमि और घर बचाने के लिए सड़क पर उतरने की बात कही। बापू ग्राम बचाओ संघर्ष समिति ने प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपकर स्थायी समाधान और भूमि के नियमितीकरण की मांग कीवन भूमि में निवासरत हजारों परिवारों ने भूमि पर स्वामित्व की मांग को लेकर महारैली निकाली, जिसमें सड़कों पर हजारों की संख्या में जनसैलाब उमड़ता पड़ा।प्रभावित परिवारों ने कहा कि उनके हित की अब तक अनदेखी होती रही। इसी का नतीजा है कि आज उन्हें अपना घर व भूमि बचाने के लिए सड़क पर उतरने को विवश होना पड़ा, लेकिन अब देरी बर्दाश्त नहीं होगी।वहीं, भाजपा, कांग्रेस, यूकेडी, स्वाभिमान मोर्चा समेत विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक व धार्मिक संगठनों ने भी महारैली में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।सोमवार सुबह 10 बजे तक आइडीपीएल हाकी मैदान में करीब 10 हजार से ज्यादा लोग एकत्र हो चुके थे। 15 से 20 मिनट के बाद कई वार्डों से रैली के रूप में लोग हाकी मैदान पहुंचते रहे, जिसके बाद पूरा हाकी मैदान लोगों से खचाखच भरा नजर आया।भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए लोगों को बाहर सड़क पर खड़ा करना पड़ा। करीब 11 बजे हाकी मैदान से महारैली शुरू हुई, जो हरिद्वार रोड, घाट चौक, रेलवे रोड, गौरा देवी चौक होते हुए ऋषिकेश तहसील पहुंची।इस दौरान दो से ढाई किलोमीटर तक दूर तक सड़क पर लोगों की भीड़ चलती नजर आई। इस दौरान प्रभावित परिवारों में सरकारों व जनप्रतिनिधियों के खिलाफ गुस्सा दिखा।जनसभा के बाद बापू ग्राम बचाओ संघर्ष समिति की ओर से एसडीएम ऋषिकेश योगेश मेहरा के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को प्रेषित किया गया। जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री से प्रभावित परिवारों को भूमि पर स्वामित्व दिलाने की मांग की।महारैली में महापौर शंभू पासवान, पूर्व काबीना मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण, पूर्व महापौर अनीता ममगाईं, वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयेंद्र रमोला, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल, महानगर अध्यक्ष राकेश सिंह, पूर्व पालिकाध्यक्ष दीप शर्मा, वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी भगत सिंह कोठारी, भाजपा जिला महामंत्री प्रतीक कालिया, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रविंद्र राणा, बार एसोसिएशन ऋषिकेश के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह सजवाण, सचिव राज कौशिक, वरिष्ठ अधिवक्ता जय सिंह रावत, सचिव सुरेश नेगी, भाजपा अनुसूचित मोर्चा प्रदेश मंत्री प्रकांत कुमार, ऋषिकेश छात्रसंघ अध्यक्ष मयंक भट्ट, उपाध्यक्ष आयुष तड़ियाल, संघर्ष समिति सदस्य रमेश जुगलान, रविंद्र राणा, राम कुमार कश्यप , क्षेत्रीय पार्षद राजेंद्र बिष्ट, बीरेंद्र रमोला, अनिल रावत, सत्य कपरुवाण, राजेश कोठियाल आदि शामिल रहे।
प्रधानमंत्री से न्याय दिलाने की मांग की
बापू ग्राम बचाओ संघर्ष समिति की ओर से सौंपे ज्ञापन में कहा गया कि बापू ग्राम को महात्मा गांधी की शिष्या मीरा बेन ने गोद लेकर स्वतंत्रता से पहले यहां रहने वाले निर्धन अनुसूचित एवं सामान्य जाति के लोगों को जीवन स्तर सुधारने व आत्मनिर्भर बनाने के लिए बसाया।26 मई 1950 को पशुलोक सेवा मंडल के नाम से समिति बनाकर तात्कालीन सरकार से लीज पर भूमि लेकर नियोजित गांव व कृषि भूमि की व्यवस्था की गई थी।उक्त 2866 एकड़ भूमि पर वर्तमान में एम्स ऋषिकेश, पशुपालन विभाग, टिहरी विस्थापित, आइडीपीएल संस्थान, जल संस्थान, विद्युत विभाग, विद्यमान है, शेष 578.90 एकड़ भूमि पर वर्तमान में बापूगाम क्षेत्र के शिवाजी नगर, बीसबीघा, मीरानगर, बापूग्राम, सुमन विहार, नंदू फार्म, गीतानगर, मालवीय नगर, अमित ग्राम आदि वार्ड हैं। इनकी लगभग 17 हजार परिवार व लगभग 80 हजार की आबादी निवास करती है।इसी क्षेत्र को वर्ष 1967 से ग्राम सभा ऋषिकेश व वर्ष 2017 से नगर निगम के 12 वार्डों के रूप में मान्यता दी गई। वर्तमान में इन क्षेत्रों में विभिन्न सरकारी विभागों की विश्व बैंक की मदद से कई करोडों रुपये की जन कल्याणकारी योजनाएं गतिमान हैं।कहा कि 22 दिसंबर 2025 को इन क्षेत्रों की वन भूमि में स्वामित्व का मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, जिसके बाद इन सभी क्षेत्रों में विकास कार्यों पर रोक लगा दी गई है।सरकार को खाली पड़ी भूमि को कब्जे में लेने का निर्देश दिया गया है। जिससे यहां निवासरत हजारों परिवारों को बेघर होने की चिंता सता रही है।कहा कि न्यायालय आदेश से उत्पन्न स्थिति के स्थायी समाधान के लिए पूरे बापूग्राम क्षेत्र की भूमि का नियमितीकरण कर राजस्व श्रेणी में लाने की दिशा में कार्यवाही आवश्यक है।
महारैली में मातृशक्ति रही आगे
आंदोलन सामाजिक, पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा हो या अस्तित्व की लड़ाई हो, उत्तराखंड की मातृशक्ति ने निर्णायक भूमिका निभाई है।सोमवार को निकाली गई ऐतिहासिक महारैली को सफल बनाने का श्रेय भी मातृशक्ति को जाता है। महारैली में उमड़े जनसैलाब में करीब 80 से 85 प्रतिशत महिलाएं शामिल थी।खास बात रही कि इनमें 18 वर्ष के युवाओं से लेकर 80 वर्षीय बुजुर्ग महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बुजुर्गों को युवा पीढ़ी के भविष्य पर मंडराए संकट की चिंता थी तो युवा पीढ़ी को भी इस प्रकरण की गंभीरता का अहसास था।
राज्य सरकार की चुप्पी चिंताजनक : कांग्रेस
जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल व कांग्रेस महानगर अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि भाजपा की ट्रिपल इंजन की सरकार होने के बावजूद हजारों प्रभावित परिवार आज सड़क पर संघर्ष करने को मजबूर हैं।जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल व जयेंद्र रमोला ने कहा कि प्रदेश सरकार ने अब तक प्रभावित परिवारों के पक्ष में कोई ठोस आश्वासन नही दिया है। यह चुप्पी चिंताजनक है।
गढ़वाली पारंपरिक वेशभूषा में पहुंची महिलाएं
समाजसेवी कुसुम जोशी के नेतृत्व में कई महिलाएं गढ़वाली पारंपरिक वेशभूषा में महारैली में पहुंची। उन्होंने लोक संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया। पारंपरिक वेशभूषा में शामिल महिलाओं ने खासा ध्यान खींचा। उन्होंने प्रभावित परिवारों के साथ न्याय की मांग को उठाया।
