उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
ऋषिकेश के पशुलोक जलाशय में 19 सीटर सी-प्लेन का सफल परीक्षण हुआ, जो उत्तराखंड में पर्यटन और परिवहन के लिए एक नई शुरुआत है।पशुलोक जलाशय में सोमवार को रोमांचित करने वाला नजारा दिखा। जलाशय में सी-प्लेन उतरा और उड़ान भी भरी। जो भी इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना वह आश्चर्यचकित हुए बिना नहीं रह सका।उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सहयोग से स्काई हाक कंपनी की ओर से पशुलोक जलाशय में 19 सीटर सी-प्लेन उतारने का सफल ट्रायल किया गया।इसे उत्तराखंड में पर्यटन और परिवहन के क्षेत्र में नई उड़ान की शुरुआत माना जा रहा है।यूकाड़ा ने प्रदेश की पांच झीलों ऊधम सिंह नगर में हरिपुरा जलाशय, ऋषिकेश बैराज, टिहरी झील, नानकमत्ता बैराज और कालागढ़ झील को जोड़ते हुए सी-प्लेन सर्किट योजना बनाई है।पहले ट्रायल के रूप में सोमवार शाम करीब छह बजे उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) के बैराज जलाशय में सी-प्लेन की लैंडिंग हुई।सी-प्लेन ने जौलीग्रांट एयरपोर्ट के रन-वे से शाम पांच बजकर 53 मिनट पर उड़ान भरी। छह बजे सी-प्लेन जलाशय में पहुंचा। जलाशय के ऊपर चक्कर लगाने के बाद पानी में लैंडिंग की डीएचसी-6 सीरीज 400 का यह सी-प्लेन जलाशय में लैंड होने के बाद लोगों को उतरने के लिए जलाशय में बनाए गए अस्थायी रास्ते तक भी पहुंचा।कुछ देर रुकने के बाद सी-प्लेन ने जलाशय से उड़ान भरी। ट्रायल के दौरान प्लेन में पायलट, को-पायलट और इंजीनियर सवार थे।यूजेवीएनएल के एसडीओ अतुल शर्मा ने बताया कि ट्रायल सफल रहा है, जो आने वाले समय में पर्यटन के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा।स्काई होप के अधिकारियों ने बताया कि जलाशय में सी प्लेन उतारने के लिए दो बार लैंडिंग और टेक आफ हुआ।एसडीएम योगेश मेहरा ने बताया कि तीसरी लैंडिंग और टेक आफ का ट्रायल मंगलवार को किया जाएगा। यूकाडा के सीईओ आशीष चौहान ने कहा कि भविष्य में इन स्थानों पर भी ट्रायल लैंडिंग का प्रयास किया जाएगा।
यह होगा फायदा
चारधाम यात्रा, एडवेंचर टूरिज्म और वीकेंड ट्रैवल को बढ़ावा मिलेगा।
देश-विदेश के पर्यटक कम समय में सीधे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच सकेंगे।
स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
ऐसे दुर्गम क्षेत्र जहां सड़क या पारंपरिक हवाई सेवाएं पहुंचना मुश्किल हैं वहां पर्यटक आसानी से पहुंच पाएंगे।
नए पर्यटक स्थल सामने आएंगे। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्यों में मदद मिलेगी
प्रदेश को पर्यटन के मानचित्र में नई पहचान मिलेगी
