उत्तराखंड डेली न्यूज़: ब्योरो

एक वक्त था जब नैनीताल के DSB कॉलेज में एडमिशन के लिए नेताओं, अफसरों और बड़े चेहरों की सिफारिशें चलती थीं. छात्रों के लिए मेरिट लिस्ट में नाम लाना आसान नहीं था. लेकिन आज हालात बदल गए हैं. आज कॉलेज की सीटें खाली हैं और क्लासरूम सुनसान पड़े हैं।उत्तराखंड के फेमस डीएसबी कैंपस में इस साल एडमिशन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आया है. एक समय था जब इस कॉलेज में दाखिला लेना बहुत मुश्किल होता था. बीए, बीएससी और बीकॉम जैसे पारंपरिक कोर्सों में एडमिशन के लिए न सिर्फ मेरिट की दौड़ होती थी, बल्कि मंत्री और आला अधिकारियों तक की सिफारिशें लगानी पड़ती थीं. लेकिन अब वही कॉलेज छात्रों की उदासीनता का शिकार हो गया है।गौरतलब है कि कुमाऊं विश्वविद्यालय से संबद्ध डीएसबी कॉलेज में 2025-26 सत्र के लिए एडमिशन प्रक्रिया जारी है. बीए में 600 सीटों में से केवल 280, बीएससी में 360 सीटों में से 91 बायोलॉजी और 95 मैथ्स ग्रुप में ही दाखिले हुए हैं. वहीं बीकॉम की 180 सीटों पर अब तक सिर्फ 75 छात्र ही दाखिला ले पाए हैं. ये आंकड़े कॉलेज प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं।इस कारण घटा छात्रों का रुझान
छात्रसंघ के पूर्व सचिव राहुल नेगी बताते हैं कि छात्रों का झुकाव अब पारंपरिक कोर्सों के बजाय प्रोफेशनल और स्किल-आधारित कोर्सेज की ओर अधिक हो गया है. डीएसबी के ही प्रोफेशनल कोर्सेज में सभी सीटें भर चुकी हैं. इसके साथ ही छात्रों का रुझान दिल्ली यूनिवर्सिटी और अन्य प्राइवेट यूनिवर्सिटियों की ओर भी तेजी से बढ़ा है. हालांकि कॉलेज प्रशासन ने इस स्थिति को देखते हुए एडमिशन की अंतिम तिथि 31 जुलाई से बढ़ा दी है, ताकि इच्छुक छात्र अब भी पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकें।कॉलेज का रहा है स्वर्णिम इतिहास,डीएसबी कॉलेज के वनस्पति विभागाध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी ने बताया कि कॉलेज का इतिहास बेहद स्वर्णिम रहा है. 1973 से यह संस्थान हजारों छात्रों को शिक्षा देकर उन्हें समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी बनाने का कार्य करता आ रहा है. यहां से पढ़े छात्र आईएएस, पद्मश्री, विधायक, प्रोफेसर, सैन्य अधिकारी जैसे पदों पर कार्यरत हैं. प्रोफेसर तिवारी ने यह भी बताया कि कॉलेज में इस वर्ष से नई शिक्षा नीति का नया मॉड्यूल (NEP 2025) लागू किया गया है, जिसके तहत छात्रों को स्किल डेवलपमेंट के जरिए स्वरोजगार के लिए भी प्रशिक्षित किया जा रहा है।
