उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो
भारत के राजनयिक प्रयासों के बाद ईरान ने पोत को पहले से तय रास्ते से गुजरने की अनुमति दी थी। नाम न छापने की शर्त पर अधिकारी ने बताया कि ईरानी नौसेना रेडियो के माध्यम से उनके संपर्क में थी।मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच भारत को लगातार कूटनीतिक सफलता मिल रही है। पिछले सप्ताह जब तिरंगा लगा भारत का जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पहुंचा तो उसे सुरक्षित पार कराने की जिम्मेदारी खुद ईरानी नौसेना ने संभाल ली। एलपीजी लदे एक भारतीय टैंकर को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के माध्यम से सुरक्षित पार करने में मदद की थी। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में पोत पर सवार एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी है।भारत के राजनयिक प्रयासों के बाद ईरान ने पोत को पहले से तय रास्ते से गुजरने की अनुमति दी थी। नाम न छापने की शर्त पर अधिकारी ने बताया कि ईरानी नौसेना रेडियो के माध्यम से उनके संपर्क में थी। ईरानियों ने जहाज का झंडा, नाम, मूल स्थान, गंतव्य बंदरगाह और चालक दल की राष्ट्रीयता (जो सभी भारतीय थे) जैसे विवरण लिए। कंफर्म होने के बाद ईरानी नौसेना भारतीय जहाज की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित की। आपको बता दें कि पिछले हफ्ते दो पोत होर्मुज से गुजरकर भारत पहुंचे थे।
अपना ट्रैफिक सिस्टम लागू करने की कोशिश में ईरान
ईओएस रिस्क ग्रुप में सलाहकार विभाग के प्रमुख मार्टिन केली ने कहा कि ऐसा लगता है कि तेहरान अब इस जलडमरूमध्य के माध्यम से अपना खुद का ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम लागू करने की कोशिश कर रहा है। वह केवल मित्र देशों के पोतों को सुरक्षित रास्ता दे रहा है, जबकि अन्य देशों के पोतों पर हमले का खतरा बना हुआ है।
भारत की कूटनीतिक जीत
जॉर्डन और लीबिया में भारत के पूर्व राजदूत अनिल त्रिगुणायत ने कहा कि भारत का सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करना यह दिखाता है कि कूटनीति अभी भी संभव है। उन्होंने कहा, ईरान इस मोड़ पर हर किसी के साथ रिश्ते खराब नहीं करना चाहता। भारत एक मध्यस्थ की भूमिका भी निभा सकता है, और इन्हीं कारकों के कारण भारत को यह विशेष छूट मिली।ब्लूमबर्ग के अनुसार, जलडमरूमध्य में प्रवेश करने से पहले नाविकों ने अपने लाइफ राफ्ट तैयार कर ली थीं। वे लगभग 10 दिनों तक फारस की खाड़ी में लंगर डाले हुए थे, जिसके बाद 13 मार्च की रात उन्हें गुजरने की अनुमति मिली। जहाज ने अपना एआईएस बंद कर दिया था ताकि उनकी स्थिति ट्रैक न हो सके। पूरे क्षेत्र में जीपीएस सिग्नलों में हस्तक्षेप के कारण वे जीपीएस का उपयोग नहीं कर पाए, जिससे यात्रा में सामान्य से कई घंटे अधिक समय लगा। जलडमरूमध्य के दूसरी तरफ भारतीय नौसेना के युद्धपोत उनका इंतजार कर रहे थे।दुनिया के 22 देशों ने बोला, होर्मुज फिर खुले,संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान सहित 22 देशों ने ईरान से हमले रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का आग्रह किया है। इन देशों ने संयुक्त बयान जारी कर इसे अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। साथ ही आग्रह किया कि ईरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के नियमों का पालन करे। देशों ने इस क्षेत्र में व्यापारिक पोतों के साथ-साथ तेल और गैस सुविधाओं पर ईरान के हमलों की निंदा भी की है। 19 मार्च को रिलीज किए गए इस बयान को यूएई विदेश मंत्रालय ने शनिवार को एक्स पर पोस्ट किया।
सभी लोगों पर पड़ेगा असर
संयुक्त बयान में उन्होंने कहा, ईरान की इन कार्रवाइयों का असर दुनिया के सभी हिस्सों के लोगों पर, खासकर सबसे ज्यादा कमजोर लोगों पर पड़ेगा। इसमें होर्मुज से गुजरने वाले कॉमर्शियल पोतों पर हमले की आलोचना की गई है। लिखा, हम खाड़ी में बिना हथियार वाले कमर्शियल पोतों पर ईरान की ओर से किए गए हमलों, तेल और गैस प्रतिष्ठानों सहित नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने और ईरानी सेना द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किए जाने की कड़ी आलोचना करते हैं।ईरान से कहा कि वह कॉमर्शियल शिपिंग के लिए स्ट्रेट को रोकने की अपनी धमकियों, माइन बिछाने, ड्रोन और मिसाइल हमलों और दूसरी कोशिशों को तुरंत रोके। ईरान यूएन सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का पालन करे। इसके मुताबिक इंटरनेशनल शिपिंग में हमले से दखलअंदाजी और ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन में रुकावट अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है।
इन देशों ने की अपील
संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, जापान, कनाडा, कोरिया गणराज्य (दक्षिण कोरिया), न्यूजीलैंड, डेनमार्क, लातविया, स्लोवेनिया, एस्टोनिया, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, चेकिया, रोमानिया, बहरीन, लिथुआनिया और ऑस्ट्रेलिया।
