उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो

देहरादून में दो हफ्ते पहले आई जल प्रलय के पीड़ित अभी भी राहत कैंपों में जीने को मजबूर हैं। घर-बार, खेत-खलिहान सब बर्बाद हो चुका है। लोग त्योहारों में घर तलाश रहे हैं।देहरादून के सहस्रधारा क्षेत्र से सटे कारलीगाड़ और मजाड़ा गांव में पंद्रह दिन बाद भी हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। आपदा प्रभावित इलाकों के सात परिवार अब भी राहत शिविर में रहने को मजबूर हैं। कुछ लोग ऐसे हैं, जिनके मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। यह लोग त्योहारों पर घर तलाश रहे हैं। फिलहाल उनके पास किराये के घर में रहने का ही विकल्प बचा है।मजाड़ा निवासी रतन सिंह नेगी ने बताया कि जो लोग राहत शिविर में रह रहे हैं, उनमें मनोज, भगवान दास और राकेश का घर कारलीगाड़ से पांच किलोमीटर दूरी पर बासूधार में है। लेकिन सड़क बाधित होने के कारण वे वापस नहीं लौट पा रहे हैं। सुमेर चंद, प्रेम सिंह का घर क्षतिग्रस्त हो चुका है। वे अब विस्थापन की मांग उठा रहे हैं। रोशन लाल और कृपाल सिंह मिश्रा के साथ कई लोग राहत शिविर में रहने को मजबूर हैं। कुछ लोग रिश्तेदारों के घर पर ठहरे हैं।पूर्व प्रधान यशपाल का कहना है कि लोग अपने घरों की तरफ लौटने की राह तलाश रहे हैं। फिलहाल हालात सामान्य होने में समय लगेगा। एसडीएम हरिगिरि ने बताया कि जिन लोगों के घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। उनको प्रशासन की ओर से छह महीने का किराया दिया जाएगा।
सड़क को दुरुस्त होने में लगेगा समय
जिला प्रशासन के स्तर से बेशक राहत कार्यों की जिम्मेदारी कुछ विभागों को सौंपी गई है। ऊर्जा निगम ने बिजली सप्लाई के लिए नए पोल लगाए हैं। लेकिन, सड़कों की मरम्मत में अभी समय लगेगा। मजाड़ा और कारलीगाड़ के बीच स्थाई पुल भी टूट गया था।मलबे में दबे खेत, रोजी रोटी का संकट कायम
मजाड़ा और कारलीगाड़ के बीच जहां पहले चावल की खेती होती थी, पंद्रह से बीस बीघा भूमि अब मलबे में दब चुकी है। लोगों को रोजी-रोटी की चिंता सता रही है। उनका कहना है कि जेसीबी लगा कर मलबा हटवाया जाए, ताकि वे फिर से खेतीबाड़ी कर सकें। गांव तक आने-जाने के रास्तों को भी ठीक करना पड़ेगा।
परीक्षाएं सिर पर, बोर्ड वाले भी परेशान
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र रावत ने बताया कि ज्यादातर बच्चे स्कूलों के आसपास ही रहते थे। वे रास्ते टूटने पर भी स्कूल आ जाते थे। लेकिन, अब ये बच्चे दूर राहत कैंपों में चले गए हैं। इसी महीने गृह परीक्षाएं हैं। बोर्ड परीक्षा वाले बच्चों को काफी दिक्कत है।
मदद के लिए आगे आया एमडीडीए
मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) के उपाध्यक्ष और अफसर कर्मचारी अपना एक दिन का वेतन आपदा प्रभावितों की मदद के लिए देंगे। उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने यह पहल की है। उन्होंने बताया कि सितंबर के वेतन से कटौती से मिली राशि एकमुश्त संकलित कर मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में जमा करवाई जाएगी। संकट की घड़ी में सरकारी संस्थान और अफसर-कर्मचारी पीड़ित परिवारों के साथ मजबूती से खड़े हैं। उत्तरकाशी के धराली और चमोली के थराली में आपदा से नुकसान हुआ था। देहरादून में भी अतिवृष्टि से नुकसान पहुंचा। लिहाजा, तिवारी ने सभी विभागों से अपील की है कि जरूरतमंद लोगों की हरसंभव मदद करें।
