उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो

उत्तराखंड में बारिश और बर्फबारी न होने से सूखे जैसे हालात पैदा हो रहे हैं। ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। ऐसे में निराश लोगों ने अब देवताओं से गुहार लगानी शुरू की है।बर्फबारी के महीनों में पहाड़ के ग्रामीण, बारिश की बूंद-बूंद और बर्फ के फाहों के लिए तरस रहे हैं। उत्तराखंड के विभिन्न इलाकों में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो गई है। मौसम की बेरुखी से परेशान चमोली के ग्रामीणों ने अब देवी-देवताओं और प्रकृति की आराधना करते हुए बारिश-बर्फबारी के लिए ‘उच्याणा’ रखा है।उत्तराखंड समेत तमाम पहाड़ी राज्य इस बार बारिश-बर्फबारी को तरस रहे हैं। उत्तराखंड में बीता ढाई महीना बारिश के लिहाज से सूखा गुजर गया। इससे परेशान पर्वतीय क्षेत्रों में लोग सिंचाई और पेयजल के संकट से जूझ रहे हैं। इस मुश्किल से पार पाने के लिए ग्रामीण अब आस्था का सहारा ले रहे हैं। विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय परंपराएं निभाते हुए ग्रामीण सामूहिक रूप से अपने कुल देवी-देवताओं और ग्राम देवताओं की विशेष पूजा-अर्चना में जुट गए हैं। शनिवार को चमोली जिले की वाण ग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने चौपाल बुलाई। इस चौपाल में लोगों ने लाटू देवता और मां नंदा देवी से सामूहिक मन्नत (उच्याणा) मांगी।ग्रामीण बोले-उच्याणा हमारी लोक आस्था
ग्रामीणों ने बताया कि जब भी संकट आता है तो वे आराध्य देवों की शरण में जाते हैं। बारिश-बर्फबारी के लिए प्रकृति, देवी-देवताओं से अनुनय-विनय करना, शुभ कार्य के लिए उच्याणा रखना, लोक आस्था और प्रकृति के प्रति गहरे विश्वास का प्रतीक है। यह सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पहाड़ों की उस सामूहिक संस्कृति की भी पहचान है, जहां आज भी संकट के समय पूरा समाज एक सूत्र में बंध जाता है।बारिश न हुई तो अनुष्ठान होगा,वाण गांव के हीरा सिंह बिष्ट ने बताया कि मनौती में ग्रामीणों ने ठेठ पहाड़ी अंदाज में प्रार्थना की। उन्होंने देवी-देवताओं और प्रकृति से जल्द बारिश-बर्फबारी कराने की गुहार लगाई। चौपाल में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि एक सप्ताह में बारिश नहीं हुई तो ग्रामवासी, लाटू देवता के मंदिर में जाकर ध्यान-साधना करेंगे। यह बारिश-बर्फ पड़ने तक जारी रहेगा।
