उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो
कोचिंग संस्थानों के बढ़ते प्रभाव और बच्चों पर पड़ रहे दबाव को लेकर बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष गीता खन्ना ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर बच्चों को सब कुछ कोचिंग संस्थानों में ही सीखना है, तो फिर विद्यालयों की भूमिका क्या रह जाती है।गीता खन्ना ने कहा कि विद्यालय सिर्फ पढ़ाई का केंद्र नहीं होते, बल्कि वहां बच्चों को जीवन कौशल, सामाजिक व्यवहार, टीम वर्क और पारिवारिक संस्कार भी सीखने को मिलते हैं। लेकिन कोचिंग संस्थानों में केवल रटंत शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज बच्चे स्कूल के बाद कोचिंग और होमवर्क के दबाव में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि उन्हें खेलने, आराम करने और दोस्तों व परिवार के साथ समय बिताने का मौका नहीं मिल पाता।गीता खन्ना ने कोचिंग संस्थानों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन पर किसी प्रकार की सख्त नियामक व्यवस्था नहीं है। कई संस्थान भ्रामक विज्ञापन देकर अभिभावकों को गुमराह करते हैं और बड़े-बड़े दावे करते हैं।उन्होंने यह भी कहा कि कोचिंग संस्थानों में बच्चों के लिए न तो पर्याप्त सुविधाएं होती हैं और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम। वहीं स्कूलों और हॉस्टल्स के लिए स्पष्ट नियम और मानक तय हैं, लेकिन कोचिंग संस्थान इनसे बाहर काम कर रहे हैं।
