उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकारी अध्यक्ष व प्रखर राज्य आंदोलनकारी जय प्रकाश उपाध्याय को उक्रांद की केंद्रीय चुनाव संचालन समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। दल के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती ने आज प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने इस प्रदेश को बारी बारी लुटा है और हमारे भोले भाले लोगों को झूठे सपने दिखाकर सत्ता पर काबिज हुए हैं अबकी बार उत्तराखंड क्रांति दल अपने दम पर सरकार बनाएगी जिसके लिए जयप्रकाश उपाध्याय को यह अहम दायित्व सौंपा है। दल के प्रत्येक पदाधिकारी को अहम जिम्मेदारी दी जा रही है जिससे वह अपनी कर्तव्यों का निर्वहन जनता के हित में करें और उत्तराखंड में सरकार बनाने के लिए संकल्प को साकार करे उन्होंने आशा व्यक्त की कि जय जय प्रकाश उपाध्याय उक्रांद के एक अनुभवी नेता हैं और निष्चित तौर पर उनके अनुभव का लाभ दल को आगामी विधानसभा चुनाव में बेहतर चुनाव प्रबंधन के तौर पर मिलेगा।गौरतलब है कि केंद्रीय चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष बनाए गए जय प्रकाश उपाध्याय पिछले तीन दशक से उक्रांद से जुड़े हैं और उनका अब तक का समूचा राजनीतिक जीवन दल के संघर्षषील व जुझारू नेता के तौर पर रहा है। वे प्रखर राज्य आंदोलनकारी भी रहे हैं और 1990 के दषक में चले राज्य आंदोलन के दौरान युवा के तौर पर धरना-प्रदर्षन, चक्काजाम, स्कूल बंदी, ब्लैक आउट, दफ्तरों की तालाबंदी, रेल रोको जैसी तकरीबन हर आंदोलनात्मक गतिविधि में अग्रपंक्ति में रहे। अक्टूबर-1994 में मुजफ्फरनगर जाते समय पुलिस ने उन्हें रूड़की में गिरफ्तार कर लिया। 1995 में परिवहन निगम के महाप्रबंधक को बंधक बनाने, 1996 में भ्रष्टाचार के मामले में परिवहन निगम कर्मी को सस्पेंड कराने, 1998 में उत्तराखंड मूल के पुलिस निरीक्षक के गलत ढंग से किए गए निलंबन का पुरजोर विरोध करते हुए उनकी बहाली कराने में भी वे नेतृत्वकारी भूमिका में रहे।उपाध्याय को 1999 में बद्रीनाथ धाम में जैन मंदिर बनाए जाने के विरोध में चलाए गए आंदोलन के तहत संपूर्ण भारत में निकाली गई यात्रा का संयोजक बनाया गया। 1999 में उन्होंने श्रीबद्री नारायण गौ सेवा समिति का गठान किया। वे उक्रांद में 1998 में देहरादून नगर इकाई के सचिव, 1999 में महासचिव और साल-2001 में प्रो. ए एस शर्मा की अध्यक्षता में गठित कार्यकारिणी में कार्यवाहक नगराध्यक्ष रहे। साल- 2003 में देहरादून नगर निगम के पहले चुनाव में वे उक्रांद की ओर से पार्षद का चुनाव लड़े। उसी साल उन्हें उक्रांद युवा प्रकोष्ठ का केंद्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया।उपाध्याय के विरूद्ध वर्ष-2001 में पुलिस ने नेषनल हाईवे जाम करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया। करीब 20 साल तक चले मुकदमे में कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। साल-2004 में अनंत सिंह और बुआ सिंह के विरूद्ध चल रहे मामले में सरकार की ओर से ठीक से पैरवी न करने के विरोध में उन्होंने आंदोलन की अगुआई की। इस दौरानएक जिप्सी को आग लगने और बसों में तोड़फोड़ करने के आरोप में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर प्रताड़ित किया। साल-2004 में संभागीय परिवहन कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे प्रदर्षन के दौरान आरआई के मुंह पर स्याही पोतने के आरोप में उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार किया। वर्ष-2005 में एमडीडीए के खिलाफ उपाध्याय के नेतृत्व में एक माह लंबे आंदोलन में कई प्रमुख ट्रेनों का संचालन बाधित करने के आरोप में भी उन्हें पुलिस की प्रताड़ना झेलनी पड़ी। साल- 2005 में देहरादून सदर तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरोध में तहसीलदार के मुंह पर स्याही पोतने के आरोप में पुलिस ने उन्हें कई संगीन धाराओं के तहत मुख्य अभियुक्त बनाया।उक्रांद नेता के तौर पर उपाध्याय की साल-2005 में मूल निवास के मुद्दे पर मुख्यमंत्री आवास घेराव के दौरान गिर्तारी हुई। उसी वर्ष- परिसीमन के विरोध में मुख्य चुनाव आयुक्त एस. गोपाल स्वामी की सुनवाई के दौरान वे देहरादून टाउनहॉल में पहली मंजिल से कूद गए थे, जिसके चलते काफी देर सुनवाई रूकी रही। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर सुनवाई खत्म होने तक नजरबंद रखा।वर्ष-2006 में उक्रांद के केंद्रीय संगठन मंत्री बनाए गए उपाध्याय ने उसी साल चंद्रकूट पर्वत पर अनषन पर बैठे दल के वरिष्ठ नेता दिवाकर भट्ट की सुनवाई न होने के विरोध में देहरादून डीएम कार्यालय में प्रदर्षन का नेतृत्व करते हुए तोड़फोड़ कर डाली, जिसमें उनके विरूद्ध मुकदमा दर्ज किया गया। साल-2007 में गैरसैण को राजधानी बनाने की मांग को लेकर जयप्रकाष उपाध्याय ने विधानसभा की कार्यवाही के दौरान सदन में नारेबाजी करते हुए पर्चे फंेके। कार्यवाही बाधित हुई और मार्षल ने उन्हें हिरासत में ले लिया। वर्ष-2008 में गढ़वाल मंडल विकास निगम में अवैध भर्तियों के विरोध में उन्होंने भूख हड़ताल की और अवैध नियुतियां रद्द करवाईं। वर्ष-2008 में उक्रांद के जन समस्या निवारण प्रकोष्ठ का केंद्रीय अध्यक्ष और साल-2010 में दल के केंद्रीय महामंत्री का दायित्व उन्हें सौंपा गया। साल-2012 में उन्होंने देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र से दल के प्रत्याषी के तौर पर चुनाव लड़ा। राजधानी देहरादून में नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार व होर्डिंग माफिया के खिलाफ आंदोलन में उनके विरूद्ध मुकदमे हुए। पुलिस शिकायत प्राधिकरण कार्यालय में हंगामा होने पर उनकी गिरफ्तारी की गई। पुराने रोडवेज बस अड्डे की जमीन खुर्दबुर्द कराने के सरकार के प्रयास का विरोध करते हुए मुकदमे झेले और बिल्डर का कब्जा हटवाया। तमाम अन्य आंदोलनों में भी वे नेतृत्वकारी रहे और पुलिस उत्पीड़न झेला। उपाध्याय साल-2014 और साल-2019 में टिहरी लोकसभा क्षेत्र से और साल-2017 में मसूरी विधानसभा सीट से उत्तराखंड क्रांति दल के प्रत्याषी के तौर पर चुनाव लड़ चुके हैं। वर्ष-2020, 2022 व 2024 में उन्हें दल के केंद्रीय उपाध्यक्ष का दायित्व दिया गया।
