उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो
उत्तराखंड ने दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद स्मार्ट मीटर लगाने में बड़ी प्रगति की है। राज्य ने 4 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर स्थापित कर कई बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। यह कार्य आरडीएसएस योजना के तहत हो रहा है, जिससे वितरण कंपनियों का राजस्व बढ़ा है और एटीएंडसी घाटा कम हुआ है। उपभोक्ताओं को रियल-टाइम खपत और रिचार्ज जैसी सुविधाएं मिल रही हैं, जिससे राज्य डिजिटल ऊर्जा प्रबंधन में अग्रणी बन रहा है।उत्तराखंड ने दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद स्मार्ट मीटरिंग के क्षेत्र में बड़ी प्रगति की है। स्मार्ट मीटर लगाने की रफ्तार में राज्य ने कई बड़े व मैदानी राज्यों को पीछे छोड़ते हुए मिसाल पेश कर दी है।उत्तराखंड में चार लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। यह कार्य आरडीएसएस योजना के तहत किया जा रहा है। राज्य में कुल 15,87,870 उपभोक्ता मीटर हैं, शेष कनेक्शन में स्मार्ट मीटर लगाने का काम अभी जारी है।केंद्रीय विद्युत मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार देशभर में 3.90 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। पंजाब, गोवा, मेघालय, दिल्ली व अंडमान-निकोबार में अभी तक स्मार्ट मीटर का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। तमिलनाडु में उपभोक्ता मीटर स्थापना शून्य है और केवल सीमित संख्या में फीडर मीटर लगाए गए हैं। पहाड़ी राज्यों में चुनौतियां अधिक होती हैं, इसके बावजूद 4.21 लाख से अधिक मीटर स्थापित करना बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
उपभोक्ताओं और डिस्काम दोनों को लाभ
स्मार्ट प्रीपेड मीटरिंग से वितरण कंपनियों के राजस्व संग्रह, घाटे में कमी और नकदी प्रवाह में सुधार हुआ है। वित्तीय वर्ष 2021 में 21.91 प्रतिशत रहा एटीएंडसी घाटा घटकर वर्तमान वित्तीय वर्ष में 15.04 प्रतिशत पर आ गया है। उपभोक्ताओं को मोबाइल एप के माध्यम से रियल टाइम खपत की जानकारी, रिचार्ज सुविधा, कम बैलेंस पर अलर्ट जैसी सुविधाएं मिल रही हैं।
डिजिटल प्रबंधन में अलग पहचान
ऊर्जा क्षेत्र में जलविद्युत उत्पादन के लिए पहचाने जाने वाला उत्तराखंड अब डिजिटल प्रबंधन में भी अपनी अलग पहचान बना रहा है। यूपीसीएल के अनुसार यदि इसी गति से स्थापना कार्य जारी रहा तो राज्य न केवल अपने लक्ष्य को समय से पहले पूरा कर लेगा, बल्कि वितरण सुधार के राष्ट्रीय मानकों में भी अग्रणी भूमिका निभाएगा।
