उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो

रबी की फसल के बाद खेत खाली छोड़ने के बजाय किसान 40-50 दिन की भाजी की खेती कर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं. पालक, मैथी, चौलाई जैसी फसलों से कम लागत में 50 हजार रुपये तक की कमाई संभव है. भाजी के बाद उसी खेत में टमाटर, मिर्च और बैंगन का प्लांटेशन कर समय और लागत दोनों बचाई जा सकती है. कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक सघन खेती से 6 महीने में तीन फसलें ली जा सकती हैं. यह तरीका किसानों को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बना सकता है.रबी सीजन में जिन किसानों ने प्याज और आलू की खेती की थी, फरवरी शुरू होते-होते उनकी फसल आखिरी चरण में पहुंच चुकी है. अब खेत खाली होने लगे हैं और साथ ही मार्च में टमाटर, मिर्च और बैंगन जैसी फसलों की तैयारी भी शुरू हो जाती है. लेकिन अगर किसान चाहें, तो इन दो फसलों के बीच का समय खाली न छोड़कर 40-50 दिन की भाजी की फसल लेकर अपनी आमदनी को और बढ़ा सकते हैं.
फरवरी में भाजी, मार्च में सब्जी से डबल फायदा
किसान भाई 10 फरवरी तक अपने खाली हुए खेतों में पालक, मैथी, चौलाई, बथुआ और नोनिया जैसी भाजी की बुआई कर सकते हैं. इन फसलों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि 15-20 दिन में कटाई शुरू हो जाती है. जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, वैसे-वैसे बाजार में भाजी की डिमांड भी बढ़ती है और दाम अच्छे मिलते हैं.
कम लागत, बढ़िया मुनाफा
एक एकड़ खेत से किसान भाई 40 से 50 हजार रुपये तक की आमदनी कर सकते हैं, जबकि इसकी लागत सिर्फ 5 से 8 हजार रुपये आती है. यानी बहुत कम खर्च में अच्छा मुनाफा. यही नहीं, भाजी की फसल लगाने से खेत की मिट्टी में नमी बनी रहती है, जिससे अगली फसल की तैयारी भी आसान हो जाती है.सघन खेती से बढ़ेगी आमदनी ,भाजी की कटाई के बाद जैसे ही खेत खाली होता है, उसकी सफाई कर दोबारा जुताई करें और बेड प्लांटर से मेढ़ बना लें. इसके बाद उसी खेत में बैंगन, मिर्च और टमाटर का प्लांटेशन किया जा सकता है. इस तरीके को सघन खेती कहा जाता है, जिसमें एक ही खेत से कम समय में ज्यादा फसल ली जाती है.
कृषि वैज्ञानिक की सलाह
सागर कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. के. एस. यादव बताते हैं कि किसान तभी समृद्ध होगा जब खेती से लगातार पैसा आएगा. जिन किसानों के खेत आलू निकालने के बाद खाली हो गए हैं, वे खरपतवार हटाकर खेत की अच्छी सफाई करें. इसके बाद मूली से लेकर अलग-अलग भाजी की बुवाई कर सकते हैं. यह फसल 40 से 50 दिन में तैयार हो जाती है.
एक खेत, तीन फसलें, छह महीने में बनें मालामाल
डॉ. यादव कहते हैं कि जब तक भाजी की फसल खेत में चल रही हो, तब तक किसान भाई बैंगन, टमाटर और मिर्च की नर्सरी तैयार कर लें. जैसे ही भाजी की फसल कटे, उसी मेढ़ पर तुरंत प्लांटेशन कर दें और ड्रिप से सिंचाई करें. इससे करीब एक महीने का समय बच जाता है और टमाटर ट्रांसप्लांट के एक महीने बाद ही फल देने लगता है. इस तरह किसान 6 महीने में तीन फसलें लेकर अपनी आमदनी को लगातार बनाए रख सकते हैं.
आत्मनिर्भर बनने का रास्ता
असल में किसान अपनी पूरी साल की आर्थिक स्थिति खेती पर ही निर्भर करता है. अगर वह थोड़ी समझदारी और मेहनत करे, तो अपनी आय बढ़ा सकता है. जिन किसानों के पास गर्मी के लिए पानी की सुविधा है, उन्हें इस मॉडल को जरूर अपनाना चाहिए. जब एक किसान ऐसा करता है, तो दूसरे किसान भी प्रेरित होते हैं और धीरे-धीरे पूरा क्षेत्र समृद्ध बनता है.
