उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो
होली का त्योहार सिर्फ रंगों और मस्ती का नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की जीत और घरेलू कलह-क्लेश से मुक्ति का भी प्रतीक है। 2026 में होलिका दहन 2 मार्च को होगा। इस दिन विधि-विधान से होलिका पूजन करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा, ऊपरी बाधा, प्रेत बाधा और गृह क्लेश दूर हो सकता है।होलिका दहन का पर्व सिर्फ रंगों और उल्लास का नहीं, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा, घरेलू कलह, क्लेश और ऊपरी बाधाओं को जलाने का भी प्रतीक है। 2026 में होलिका दहन 2 मार्च को प्रदोष काल में होगा। शास्त्रों और लोक परंपरा के अनुसार इस दिन होलिका पूजन में कुछ विशेष सामग्री और मंत्रों का उपयोग करने से घर में चल रहे झगड़े, तनाव, नजर दोष और ऊपरी बाधा से स्थायी छुटकारा मिल सकता है। होलिका की अग्नि में सही विधि से पूजन करने से परिवार में शांति, एकता और सुख-समृद्धि का वास होता है। आइए जानते हैं होलिका पूजन की विधि और कलह-क्लेश से मुक्ति के विशेष उपाय।होलिका पूजन का शुभ मुहूर्त और महत्व,होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा की रात को किया जाता है। 2026 में यह 2 मार्च को शाम के समय शुभ मुहूर्त में होगा। पूजन के लिए स्थानीय पंचांग से सटीक समय देखें, लेकिन आमतौर पर सूर्यास्त के बाद शुरू होता है। होलिका पूजन से घर की नकारात्मक ऊर्जा जलकर भस्म हो जाती है। इस दिन पूजन करने से गृह क्लेश, झगड़े, आर्थिक रुकावटें और ऊपरी बाधाएं दूर होती हैं। होलिका की अग्नि में सामग्री अर्पित करते समय मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
होलिका पूजन की विधि और सामग्री
पूजन से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। होलिका पर फल-फूल, जल, मोली, गुलाल, गुड़, हवन सामग्री (कपूर, हरी इलायची, पीली सरसों, गोबर उपले, नारियल, पान के पत्ते, अनाज) अर्पित करें। कच्चे सूत को होलिका के चारों ओर 3 या 7 परिक्रमा कर लपेटें। लोटे से शुद्ध जल, गुलाल और अन्य सामग्री एक-एक करके अर्पित करें। पूजन के समय मंत्र पढ़ें:
अहकूटा भयत्रस्तैः ता त्वं होलि बालिशैः।
अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम्॥
इस मंत्र का 1, 3 या 5 माला (विषम संख्या) में जाप करें। पूजन के बाद जल से अर्घ्य दें।
गृह क्लेश से मुक्ति का विशेष उपाय
घर में लगातार झगड़े, कलह या तनाव रहता है तो होलिका पूजन के समय यह उपाय बहुत प्रभावी है। एक जटा वाला नारियल और 9 गोमती चक्र लें। इन्हें सिर से 8 बार उतारें या पूरे घर में घुमाकर होलिका की अग्नि में समर्पित करें। ऐसा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा जल जाती है। पूजन के दौरान मन में प्रार्थना करें कि जैसे प्रह्लाद की रक्षा हुई, वैसे ही परिवार की रक्षा हो। अगले दिन राख घर लाकर मुख्य द्वार पर छिड़कें या तिलक लगाएं। इससे कलह दूर होता है और घर में शांति आती है।ऊपरी बाधा, प्रेत बाधा से छुटकारा,यदि घर में ऊपरी बाधा, प्रेत बाधा या अज्ञात डर बना रहता है, तो होलिका दहन के समय यह उपाय करें। मंत्र का 108 बार जाप करें:
सर्वाबाधा विर्निमुक्तो धन धान्य सुतान्वितः।
मनुष्यो मत् प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥
इस मंत्र के जाप के साथ जटा वाला नारियल, 9 गोमती चक्र, सफेद बताशे, लौंग आदि को सिर से उतारकर होलिका में अर्पित करें। प्रार्थना करें कि प्रह्लाद की तरह रक्षा हो। अगले दिन राख से तिलक लगाएं या घर के कोनों में छिड़कें। यह उपाय ऊपरी बाधा से मुक्ति दिलाता है।
होलिका पूजन के बाद क्या करें
पूजन के बाद होलिका की राख घर लाएं। इसे लाल या पीले कपड़े में बांधकर पूजा स्थल या तिजोरी में रखें। राख का तिलक लगाने से नजर दोष और ग्रह पीड़ा दूर होती है। घर के मुख्य द्वार पर छिड़काव करें। अगले दिन धुलेंडी पर परिवार संग रंग खेलें और राख से उपाय करें। पूजन के दौरान सकारात्मक भाव रखें और मंत्रों का जाप करें। इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है।
