उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो
देहरादून में साइबर ठगों ने आनंदम स्वीट्स के मालिक और चमोली के एक सेवानिवृत्त अध्यापक से कुल 48.66 लाख रुपये की ठगी की। आनंदम स्वीट्स के मालिक के मोबाइल को हैक कर 24.95 लाख रुपये निकाले गए। वहीं, सेवानिवृत्त शिक्षक को फेसबुक पर निवेश विज्ञापन के झांसे में लेकर 23.71 लाख रुपये ठगे गए। दोनों मामलों में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में मुकदमा दर्ज किया गया है।साइबर ठगों ने आनंदम स्वीट्स के मालिक व चमोली के रहने वाले सेवानिवृत्त अध्यापक से 48.66 लाख रुपये की ठगी कर दी।इस मामले में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस को दी शिकायत में आनंदम स्वीट्स के मालिक आनंद स्वरूप गुप्ता, निवासी नेहरू रोड डालनवाला ने बताया कि उनका खाता एचडीएफसी बैंक में है।09 फरवरी को अज्ञात व्यक्ति ने उनका मोबाइल हैक कर दिया और खाते से 24.95 लाख रुपये किसी अन्य खाते में ट्रांसफर कर दिए।शिकायतकर्ता ने बताया कि साइबर ठगों ने एक दिन में पांच विभिन्न खातों में यह धनराशि स्थानांतरित की। नौ फरवरी को बंद हुआ उनका मोबाइल 12 फरवरी को खुला।जब उन्होंने बैंक से अपने खाते की जानकारी ली तो पता चला कि उनके खाते से मोटी धनराशि ट्रांसफर की गई है। इस मामले में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है। ठगी के दूसरे मामले में सेवानिवृत्त शिक्षक अंगद सिंह नेगी, निवासी नंदानगर, जिला चमोली ने बताया कि सात अगस्त को वह अपने घर पर फेसबुक चला रहे थे।उन्होंने एक विज्ञापन देखा, जिसमें वित्तमंत्री सीता रमण की अध्यक्षता में और गूगल के सीओ सुन्दर पिचई की ओर से 21 हजार रुपये निवेश संबंधी जानकारी दी जा रही थी।उन्होंने विज्ञापन को खोलने पर विज्ञापन के अंत में दी गई जानकारी को भरकर पंजीकरण किया तथा 16 सितंबर 2025 को उन्हें संजय नाम के व्यक्ति ने मुद्रा वन ट्रेड के बारे में बताया।उन्होंने डी मेट अकाउंट खोलकर निवेश करने के लिए कहा। ठगों ने उनसे कहा कि सामान्य बचत व एफडी पर सामान्यतः 7 से 8 प्रतिशत वार्षिक की दर से वृद्धि होती है, जबकि ट्रेडिंग के माध्यम से भी एफडी में 8 से 9 प्रतिशत मासिक की दर से वृद्धि कर दी जाती है।इसके लिए उनसे 10 लाख रुपये का निवेश कराया। साइबर ठगों ने उनसे 16 सितंबर 2025 से 30 अक्टूबर 2025 तक विभिन्न बैंक खातों में 23.71 लाख रुपये जमा करवाए। जब उन्होंने रकम निकालने का प्रयास किया तो धनराशि नहीं निकली। ठगी का एहसास होने पर उन्होंने इसकी शिकायत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दी।
