उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
प्रशासन ने तैयार किया प्रस्ताव, काफी समय से लंबित थी विस्थापन की प्रक्रियाइस साल मानसून सीजन में आपदा ने बरपाया था जिलेभर में कहर उत्तरकाशी। जिला प्रशासन की ओर से इस मानसून सीजन के बाद धराली सहित छह गांव के विस्थापन के लिए प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। इनके विस्थापन की प्रक्रिया लंबे समय से लंबित थी। डीएम के अनुसार इस वर्ष प्रयास किया जा रहा है कि इसके लिए शासन से अनुमति मिल जाए। इस वर्ष मानसून सीजन में आपदा ने पूरे जनपद में इस तरह कहर बरपाया कि कई परिवार बेघर हो गए। कहीं पर ऐसी स्थिति है कि वहां पर कभी भी भू-धंसाव और भूस्खलन होने के कारण बड़ी आपदा का रूप ले सकती है। जनपद में इस वर्ष बीते पांच अगस्त को आई आपदा ने इस तरह कहर बरपाया कि कई घर-भवन, होटल जमींदोज हो गए। कई लोग मलबे में दब गए थे।दूसरी ओर, स्यानाचट्टी में कुपड़ाखड्ड से आए मलबे के कारण यमुना अवरूद्ध होने से बनी झील के कारण कस्बे के अस्तित्व पर खतरा मंडरा गया था। साथ ही सिल्याण गांव, क्यार्क गांव में भू-धंसाव के कारण इसके अस्तित्व पर खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों की ओर से मिले प्रस्ताव के अनुसार जिला प्रशासन की ओर से धराली, धनेटी, क्यार्क गांव सहित मांडो में कुछ परिवार और उत्तरौं ओर अगोड़ा में दो परिवारों के विस्थापन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। डीएम प्रशांत आर्य ने बताया कि अगोड़ा और क्यार्क गांव के विस्थापन की प्रक्रिया पुरानी चल रही है। इनके साथ धराली और अन्य गांव के विस्थापन के लिए पुनर्वास नीति के तहत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जा रहा है।
