उत्तराखंड डेली न्यूज़: ब्योरो

यों तो हमारा हर दिन हर तारीख पर्यावरण के प्रति समर्पित हो तो इससे अच्छी कोई बात हो ही नहीं सकती। लेकिन हर दिवस का अपना एक विशेष महत्व होता है और उसी प्रकार ‘पर्यावरण दिवस’ का भी अपना महत्व है। प्रकृति मनुष्य की सहचरी है। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। दोनों ही एक दूसरे के संरक्षक और पोषक है। जहाँ एक ओर मनुष्य के ठीक प्रकार से संरक्षण से पेड़-पौधे उगते हैं, बड़े होते हैं और फलते फूलते हैं, वहीं दूसरी और मनुष्य आजीवन पेड़-पौधों पर आश्रित रहता है परंतु जब से मनुष्य ने विज्ञान की शक्ति पाकर प्रकृति पर विजय पाने का अभिमान आरंभ किया, मनुष्य अपने को प्रकृति से दूर करता गया। मनुष्य ने जब से प्रकृति का आँचल छोड़ा और विज्ञान की आँख मूँदकर शरण ली तभी से वह अनजाने में अपने ही विनाश की खाई खोदने लगा।आज जब हमारा पर्यावरण अत्यधिक प्रदूषित हो गया है तब हर कोई जानता है कि इसका मुख्य समाधान पेड़-पौधे ही है। मनुष्य को यह भली-भाँति जान लेना होगा कि पेड़-पौधे उसके जीवन की संजीवनी है तथा यह प्रदूषण महाकाल। इस प्रदूषण की समस्या में जनसंख्या विस्फोट का बहुत बड़ा हाथ है। यदि मनुष्य समय रहते सचेत हो गया तभी एक सुंदर जीवन का अधिकारी बन सकेगा। तभी शुद्ध वायु, संतुलित वर्षा, उपजाऊ भूमि, फल फूल, जड़ी बूटियाँ आदि मिल पाएँगी वरना मनुष्य द्वारा पेड़ों पर चलाई गई कुल्हाड़ी स्वयं मनुष्य पर पड़ेगी।हर वर्ष 5 जून को ‘पर्यावरण दिवस’ मनाया जाता है। इस आशय के साथ कि मनुष्य फिर से प्रकृति को सात्विक जीवन व्यतीत करने में रुचि दिखाएगा और पर्यावरण को स्वच्छ रखने का प्रयत्न करेगा। मनुष्य को यह समझना चाहिए कि ‘प्रकृति महामोहमय ममतामयी मातृत्व की अपार क्षमता संपन्न’ छाया है। वह अपने अवयवो से गुणों की रक्षा करती है।
प्रकृति इसलिए प्राणी से श्रेष्ठ है।
पेड़ लगाएँ, पर्यावरण बचाएँ।सहायक अध्यापिका द्वारा पर्यावरण दिवस पर वृक्षारोपण किया राजकीय कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय नकरौंदा,
