उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो
उत्तर प्रदेश सरकार मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए वन क्षेत्रों में चौकियों और विश्राम गृहों की सुरक्षा हेतु सोलर फेंसिंग लगाएगी।प्रदेश सरकार मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए वन क्षेत्रों में स्थित चौकियों व वन विश्राम गृहों की सुरक्षा के लिए सोलर फेंसिंग लगाने जा रही है।पहले चरण में दुधवा टाइगर रिजर्व व बहराइच के कतर्नियाघाट में इसे लगाने की योजना है। वन विभाग ने इसके लिए राहत आयुक्त को पत्र भेजकर राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि से धनराशि की मांग की है।इसके बाद दूसरे चरण में अन्य स्थानों की चौकियों व गेस्ट हाउस के चारों ओर सोलर फेंसिंग लगाई जाएगी। इस निधि से संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपकरण भी खरीदें जाएंगे।प्रदेश में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग ने राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि से मदद मांगी है। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि सरकार पहले ही मानव-वन्यजीव संघर्ष को आपदा राहत में शामिल कर चुकी है। प्रदेश सरकार मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए वन क्षेत्रों में स्थित चौकियों व वन विश्राम गृहों की सुरक्षा के लिए सोलर फेंसिंग लगाने जा रही है।पहले चरण में दुधवा टाइगर रिजर्व व बहराइच के कतर्नियाघाट में इसे लगाने की योजना है। वन विभाग ने इसके लिए राहत आयुक्त को पत्र भेजकर राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि से धनराशि की मांग की है।इसके बाद दूसरे चरण में अन्य स्थानों की चौकियों व गेस्ट हाउस के चारों ओर सोलर फेंसिंग लगाई जाएगी। इस निधि से संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपकरण भी खरीदें जाएंगे।प्रदेश में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग ने राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि से मदद मांगी है। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि सरकार पहले ही मानव-वन्यजीव संघर्ष को आपदा राहत में शामिल कर चुकी है।
अनुराधा वेमूरी ने 34.75 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अनुराधा वेमूरी ने 34.75 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव के तहत वन क्षेत्रों में स्थित वन चौकियों और वन विभाग परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सोलर फेंसिंग लगाने के लिए धनराशि की मांग की गई है।वहीं, संवेदनशील वन क्षेत्रों में वन्यजीवों के रिहायशी इलाकों में आने की घटनाओं से निपटने के लिए आवश्यक उपकरणों की खरीद भी राज्य आपदा राहत कोष से की जाएगी।वन विभाग ने ऐसे वन प्रभागों की पहचान शुरू कर दी है जहां अक्सर तेंदुआ, हाथी या अन्य जंगली जानवर आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं और मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति बन जाती है।इन क्षेत्रों में तैनात वनकर्मियों को रेस्क्यू आपरेशन और वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से जंगल में वापस भेजने के लिए आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।सरकार का मानना है कि समय पर संसाधन और उपकरण उपलब्ध होने से न केवल वन्यजीवों को सुरक्षित बचाया जा सकेगा बल्कि आम लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।इसके लिए संवेदनशील वन प्रभागों को प्राथमिकता के आधार पर उपकरण उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। यह प्रस्ताव वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए भेजा गया है। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद संवेदनशील वन क्षेत्रों में सोलर फेंसिंग लगाने के साथ ही आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।
