उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
अक्सर कहा जाता है कि शारीरिक व्यायाम शरीर के साथ-साथ दिमाग के लिए भी अच्छा है, लेकिन यह कैसे काम करता है?अक्सर कहा जाता है कि शारीरिक व्यायाम शरीर के साथ-साथ दिमाग के लिए भी अच्छा है, लेकिन यह कैसे काम करता है, यह एक रहस्य था. यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन फ्रांसिस्को (UCSF) के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी जैविक प्रक्रिया की खोज की है, जो बताती है कि व्यायाम मस्तिष्क की सुरक्षात्मक दीवार (Blood-Brain Barrier) को रिपेयर करके याददाश्त को तेज कर सकता है.
ब्लड-ब्रैन बैरियर: दिमाग का सुरक्षा कवच
हमारे दिमाग में रक्त वाहिकाओं का एक जटिल जाल होता है जिसे ‘ब्लड-ब्रैन बैरियर’ कहते हैं. यह कवच हानिकारक पदार्थों को मस्तिष्क के ऊतकों में जाने से रोकता है. जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, यह दीवार कमजोर और ‘लीकी’ (Leaky) होने लगती है. रक्त के हानिकारक तत्व दिमाग में पहुँच जाते हैं, जिससे सूजन (Inflammation) बढ़ती है और अल्जाइमर जैसी बीमारियां जन्म लेती हैं.
लिवर और दिमाग का अनोखा संबंध
रिसर्च में पाया गया कि जब हम व्यायाम करते हैं, तो हमारा लिवर एक खास एंजाइम छोड़ता है जिसे GPLD1 कहा जाता है. चौंकाने वाली बात यह है कि यह एंजाइम खुद दिमाग के अंदर नहीं जा सकता, फिर भी यह दिमाग को जवान बनाए रखता है.
कैसे काम करता है यह तंत्र? (GPLD1 और TNAP का खेल)
वैज्ञानिकों ने पाया कि उम्र बढ़ने के साथ मस्तिष्क की सुरक्षा दीवार पर TNAP नामक एक हानिकारक प्रोटीन जमा होने लगता है, जो इसे कमजोर बनाता है.फिजिकल एक्टिविटी के दौरान लिवर से निकलने वाला GPLD1 एंजाइम रक्त के जरिए मस्तिष्क की बाहरी वाहिकाओं तक पहुंचता है. यह एंजाइम वहां जमा हानिकारक TNAP प्रोटीन को काटकर हटा देता है. इसके परिणामस्वरूप मस्तिष्क की सुरक्षा दीवार फिर से मजबूत हो जाती है और सूजन कम हो जाती है.
अल्जाइमर के इलाज में नई उम्मीद
शोधकर्ताओं ने जब वृद्ध चूहों (जो इंसानी उम्र के 70 साल के बराबर थे) में इस तंत्र को सक्रिय किया, तो उनकी याददाश्त में जबरदस्त सुधार देखा गया. डॉ. शाऊल विलेडा के अनुसार, “यह खोज अल्जाइमर के उपचार के लिए नई संभावनाएँ खोलती है. अब हम ऐसी दवाओं पर काम कर सकते हैं जो व्यायाम के इस प्रभाव की नकल कर सकें.”
