उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
पत्थरचट्टा को आयुर्वेद में एक प्रभावशाली जड़ी बूटी माना जाता है. खासकर इसे इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. आइए यहां जानते हैं इस जड़ी बूटी के बारे में सब कुछ.आजकल इम्यूनिटी बढ़ाने के नाम पर बाजार में तरह-तरह के सप्लीमेंट, कैप्सूल और पाउडर मिलते हैं. टीवी विज्ञापनों से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह इम्यूनिटी बूस्टर का शोर सुनाई देता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि असली ताकत हमारे आसपास, गांव की झाड़ियों और घर की दीवारों के किनारे चुपचाप उगने वाली जड़ी-बूटियों में भी हो सकती है? ऐसी ही एक जड़ी-बूटी है ब्रायोफिलम पिन्नाटम, जिसे आम भाषा में पत्थरचट्टा, पाथरचूर, या पानफुटी भी कहा जाता है. यह पौधा देखने में साधारण लगता है, लेकिन इसके औषधीय गुण इसे बेहद खास बनाते हैं. आयुर्वेद और घरेलू उपचारों में इसका इस्तेमाल सालों से किया जा रहा है.यहां हम पत्थरचट्टा के बारे में आपको विस्तार से समझाएंगे, यह क्या है, कैसे काम करता है, किन बीमारियों में फायदेमंद है और इसे इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिएपत्थरचट्टा एक रसीला (Succulent) पौधा है जिसकी पत्तियां मोटी और हरी होती हैं. इसकी खास बात यह है कि इसकी पत्तियों के किनारों से छोटे-छोटे नए पौधे उग आते हैं. यही वजह है कि इसे लाइफ प्लांट भी कहा जाता है. भारत के कई गांवों में यह पौधा अपने आप उग जाता है. इसे ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती. यही इसकी खासियत है सादा, लेकिन गुणों से भरपूर.इम्यूनिटी यानी शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता. पत्थरचट्टा में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं.
