उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो
विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिग इकोनॉमी का एक ब्लैक बॉक्स है, जहां फिक्स्ड सैलरी और मेडिकल बेनिफिट नहीं मिलते. ग्राहकों की चिंता है कि तकनीक भरोसे का विकल्प नहीं बन पा रही, क्योंकि घरेलू कामगारों का पारंपरिक भरोसा ऐप्स से पूरी तरह नहीं जुड़ पाया है.इंस्टा पर इन दिनों मेरे फीड पर एक ऐड बहुत आता है. इसमें महिला एक ऐप से चंद मिनटों में अपने घर में ‘यूनिफॉर्म वाली मेड’ को बुला लेती है. फिर वो बताती है कि कैसे अब हाउस हेल्प बुलाना आसान हो गया है. कैसे वो महिला लिमिटेड टाइम में घर के काम जैसे झाड़ू-पोछा, बर्तन, डस्टिंग सब कर देगी. इस पर छानबीन करने पर सामने आया कि ये ऐप इकलौती नहीं है, मार्केट में ऐसी कई ऐप आ चुकी हैं.
