*~ हिन्दू पंचांग ~*

*दिनांक – 04 मार्च 2024*
*दिन – सोमवार*
*विक्रम संवत – 2080*
*शक संवत -1945*
*अयन – उत्तरायण*
*ऋतु – वसंत ॠतु*
*अमांत – 21 गते फाल्गुन मास प्रविष्टि*
*राष्ट्रीय तिथि – 14 माघ मास*
*मास – फाल्गुन (गुजरात और महाराष्ट्र अनुसार माघ)*
*पक्ष – कृष्ण*
*तिथि – अष्टमी सुबह 08:49 तक तत्पश्चात नवमी*
*नक्षत्र – ज्येष्ठा शाम 04:21 तक तत्पश्चात मूल*
*योग – वज्र शाम 04:06 तक तत्पश्चात सिद्धि*
*राहुकाल – सुबह 08:10 से सुबह 09:36 तक*
*सूर्योदय-06:40*
*सूर्यास्त- 18:19*
*दिशाशूल – पूर्व दिशा में*
*व्रत पर्व विवरण –
*विशेष – अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
*~ वैदिक पंचांग ~*
*व्यतिपात योग*
*05 मार्च 2024 मंगलवार को दोपहर 02:09 से 06 मार्च, बुधवार को दोपहर 11:33 तक व्यतिपात योग है।*
*व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है।*
*वाराह पुराण में ये बात आती है व्यतिपात योग की।*
*~ वैदिक पंचांग ~*
*एकादशी व्रत के लाभ*
*06 मार्च 2024 बुधवार को सुबह 06:31 से 07 मार्च, गुरुवार को प्रात: 04:13 तक एकादशी है।*
*विशेष – 06 मार्च, बुधवार को विजया एकादशी (स्मार्त) एवं 07 मार्च, गुरुवार को विजया एकादशी (भागवत) 07 मार्च, गुरुवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखे।*
*जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।*
*जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।*
*एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं ।इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है ।*
*धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है ।*
*कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है ।*
*परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है ।पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ ।भगवान शिवजी ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है ।*
*~ वैदिक पंचांग ~*
*एकादशी के दिन करने योग्य*
*एकादशी को दिया जलाके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें …….विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो १० माला गुरुमंत्र का जप कर लें l अगर घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे l*
*~ वैदिक पंचांग ~*
*एकादशी के दिन ये सावधानी रहे*
*महीने में १५-१५ दिन में एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए एकादशी के दिन जो चावल खाता है… तो धार्मिक ग्रन्थ से एक- एक चावल एक- एक कीड़ा खाने का पाप लगता है…ऐसा डोंगरे जी महाराज के भागवत में डोंगरे जी महाराज ने कहा*