
*~ आज का हिन्दू पंचांग ~
*

*दिनांक – 17 जनवरी 2025*
*दिन – शुक्रवार*
*विक्रम संवत् – 2081*
*अयन – उत्तरायण*
*ऋतु – शिशिर*
* अमांत – 4 गते माघ मास प्रविष्टि*
* राष्ट्रीय तिथि – 27 पौष मास*
*मास – माघ*
*पक्ष – कृष्ण*
*तिथि – चतुर्थी प्रातः 05:30 जनवरी 18 तक, तत्पश्चात पञ्चमी*
*नक्षत्र – मघा दोपहर 12:45 तक तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी*
*योग – सौभाग्य रात्रि 12:57 जनवरी 18 तक तत्पश्चात शोभन*
*राहु काल – सुबह 11:10 से दोपहर 12:27 तक*
*सूर्योदय – 07:14*
*सूर्यास्त – 05:42*
*दिशा शूल – पश्चिम दिशा में*
*ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:38 से 06:30 तक*
*अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:28 से दोपहर 01:12 तक*
*निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:24 जनवरी 18 से रात्रि 01:16 जनवरी 18 तक*
*व्रत पर्व विवरण – सकट चौथ, लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी*
*विशेष – चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
*आरोग्यप्रदायक मंत्र
*
*सूर्य मंत्र
*
*गर्मी से उत्पन्न शारीरिक रोग, बुद्धि की विकलता ( उन्माद, पागलपन) अथवा दुर्वलता, दृष्टी-रोग, अग्नि-तत्त्व की विषमता, शरीर में जलन आदि हो तो इनके निवारण के लिए सूर्य मंत्र है । किसी भी अमावस्या को ४० बार जप करने से यह मंत्र सिद्ध हो जाता है :*
*ॐ नमोऽस्तु दिवाकराय अग्नितत्त्वप्रवर्धकाय शमय शमय शोषय शोषय अग्नितत्त्वं समतां कुरु कुरु ॐ ।।*
*चन्द्र मंत्र
*
*शीत से उत्पन्न वायु-प्रधान रोगों में चन्द्र मंत्र से लाभ होता है मंत्र है :*
*ॐ चन्द्रो में चान्द्रमसान् रोगानपहरतु । औषधिनाथाय वै नम: ।*
*ॐ स्वात्मसम्बन्धिन: सर्वत: सर्वरोगान् शमय शमय तत्रैव पातय पातय । शक्तिं चोद्भावयोद्भावय ।।*
*किसी पर्व अथवा पुण्य दिवस पर चन्द्र मंत्र का २०० बार ( दो माला ) जप करने से मंत्र सदा के लिए सिद्ध हो जाता है । और अगर चन्द्रग्रहण के समय जप कर लिया जाय तो केवल २०-२५ बार जप करनेमात्र से यह मंत्र सिद्ध हो जाता है ।*
*मंत्रसिद्धि के बाद इनमें से जिस मंत्र की आवश्यकता हो उसका पानी में देखते हुए ५, ७ या ११ बार जप करें । यह अभिमंत्रित जल रोगी को स्पर्श कराने , लगाने, पिलाने और उससे स्नान कराने से भी बहुत लाभ होगा ।*
*इन मंत्रों का उपयोग अपने परिचितों, हितैषियों के लिए भी कर सकते हैं, अपने लिए भी कर सकते हैं ।*