उत्तराखंड डेली न्यूज़: ब्योरो

एससीएसटी शिक्षक ऐसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय कुमार टम्टा ने 1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले को गलत बताया है, जिसमें प्रारंभिक शिक्षा में टीईटी की अनिवार्यता को लागू किया गया है। इससे 12,000…एससीएसटी शिक्षक ऐसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय कुमार टम्टा ने एक सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के महाराष्ट्र मामले में एक फैसले में प्रारंभिक शिक्षा में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता को शिक्षकों के विरुद्ध बताया है। उन्होंने महानिदेशक विद्यालय शिक्षा एवं शिक्षा मंत्री को मेल के माध्यम से ज्ञापन भेजा है। टम्टा ने कहा कि 2010 से पूर्व प्रारंभिक शिक्षा में टीईटी की अनिवार्यता नहीं थी। इससे पूर्व नियुक्त शिक्षक तत्कालीन योग्यता पूरी करते हुए नियुक्त हुए हैं। इस फैसले से प्रदेश के लगभग 12,000 शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। इससे उनकी सेवा, पदोन्नति आदि प्रभावित हो रही है।इस फैसले से शिक्षकों में मानसिक तनाव बढ़ रहा है, जो शिक्षा व्यवस्था को भी प्रभावित करेगा। एक दुखद उदाहरण उत्तर प्रदेश के गांधी नगर से सामने आया है, जहां शिक्षक मनोज कुमार साहू ने इस फैसले के बाद उत्पन्न तनाव से आत्महत्या कर ली। इस घटना से पूरे शिक्षक समुदाय में हलचल मची है। यह घटना दर्शाती है कि ऐसे फैसलों का मानवीय पक्ष कितना गंभीर है। उत्तराखंड में भी कई शिक्षक अवसाद एवं चिंता से ग्रस्त हैं, यदि तत्काल राहत नहीं दी गई तो ऐसी घटनाएं यहां भी दोहराई जा सकती हैं। शिक्षक के कार्य का मूल्यांकन प्रतिवर्ष परीक्षाफल के माध्यम से होता है। इतनी लंबी सेवा के बाद शिक्षकों से पढ़ाए जा रहे पाठ्यक्रम से बाहर पुनः उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए बाध्य करना अनुचित है। यह आदेश शिक्षकों के हितों के विरुद्ध है। इसलिए इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करें।
