उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो

आप की पूंजी, आप का अधिकार’ स्लोगन से भारत सरकार की निष्क्रिय खातों के वारिसों को रकम लौटाने की मुहिम जरूरतमंदों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। बैकों की ओर से छोटी धनराशि से लेकर लाखों रुपये लौटाए जा रहे हैं। जिसके तहत 6 लाख रुपए वापस किए गए हैं।आप की पूंजी, आप का अधिकार’ स्लोगन से भारत सरकार की निष्क्रिय खातों के वारिसों को रकम लौटाने की मुहिम जरूरतमंदों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। बैकों की ओर से छोटी धनराशि से लेकर लाखों रुपये लौटाए जा रहे हैं। शुक्रवार को आईआरडीटी सभागार में नथुवावाला देहरादून निवासी देवेंद्र कुमार को उनके दादा की मौत के 27 साल बाद 6 लाख रुपये दिए गए। रोचक बात यह है कि उन्हें इस बैंक खाते के बारे में जानकारी ही नहीं थी। देवेंद्र ने बताया कि दादा का निधन 1998 हो गया था। मौत से पहले उनका एसबीआई में खाता था, परिजनों को इसकी जानकारी नहीं थी। कुछ दिन पहले उनके घर पर बैंक कर्मचारी आए, उन्होंने वेरिफिकेशन के बाद संबंधित बैंक खाते का जिक्र किया। उनसे दादा की डेथ सर्टिफिकेट आदि मांगा और शुक्रवार को बैंक ने उन्हें छह लाख का चेक दे दिया। देवेंद्र ने बताया कि यह उनके दादा का आशीर्वाद है। इस रकम को वो बच्चों की पढ़ाई में लगाएंगे। देवेंद्र निजी कंपनी में नौकरी करते हैं।17 साल बाद मिले पांच लाख रुपये
देहरादून निवासी शिबानी अरोड़ा के चाचा ने वर्ष 2000 में अपने एक बैंक खाते में उन्हें नोमिनी बनाया था। उनके चाचा की मौत वर्ष 2008 में हो गई थी। शिबानी ने बताया कि इस बारे में परिवारवालों को कोई जानकारी नहीं थी। लेकिन एक बैंक कर्मचारी उनके घर के पास में रहता था, जो उनके चाचा और उन्हें पहचानता था। कुछ दिन पहले बैंक कर्मचारी ने उनसे चाचा के बारे में पूछताछ की और उन्हें उनके खाते के बारे में बताया। वैरिफकेशन के बाद पता चला खाते में पांच लाख रुपये जमा हैं। यह रकम शुक्रवार को शिबानी को मिल गई। रकम पाकर वो बेहद खुश हैं।
बैंकों ने लौटाए 10.27 करोड़
दून के बैकों में रुपये जमा कर भूले लोगों को आरबीआई के अभियान के तहत 10.27 करोड़ रुपये लौटा दिए गए हैं। देहरादून में अभी भी करीब पांच लाख निष्क्रिय खातों में 200 करोड़ रुपये जमा हैं। राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी और जिला अग्रणी बैंक की ओर से गुरुवार को सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी सभागार में आपकी पूंजी आपका अधिकार विषय पर जन जागरूकता शिविर लगाया गया। सीडीओ अभिनव शाह ने 10 लोगों को चेक वितरित किए। वक्ताओं ने कहा कि कई बार लोग पुराने बैंक खातों से रुपये निकालना भूल जाते हैं। खाताधारक की मौत के बाद वारिसों को बैंक में जमा राशि का पता नहीं होता है। आरबीआई अब ऐसे खाताधारकों की तलाश कर रहा है। ऐसे खातों की रकम आरबीआई के विशिष्ट फंड में भेजी गई थी। अभी तक ₹10.27 करोड़ बैंकों द्वारा उनके वास्तविक स्वामी, दावाकर्ताओं को लौटा दी गयी है।
पुराने फोन नंबर के कारण मिले 1.11 लाख
देहरादून निवासी वासुदेव ने 2014 में एजेंट के जरिए एक पीएनबी बैंक खाता खुलवाया था। इसके बाद वो खाते के बारे में भूल गए। लेकिन जो नंबर उन्होंने बैंक में लिखवाया था उसे वो वर्ष 2000 से उपयोग कर रहे हैं। 25 सालों से नंबर उपयोग में है तो कुछ दिन पहले बैंक से उन्हें संबंधित खाते की जानकारी के लिए फोन आया। बैंक कर्मी घर आए और वैरिफिकेशन किया। पता चला कि जो छोटी रकम उन्होंने 2014 में जमा कराई थी वो ब्याज के साथ 1.11 लाख रुपये हो गई है। वासुदेव ने बताया कि अगर वो नंबर बदल देते तो रकम नहीं मिलती। उन्होंने 1.11 लाख की हाथोंहाथ एफडी करवा दी है।
