उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो

1971 War Hero: 1971 की जंग के हीरो नारायण भट्ट ने हिन्दुस्तान से खास बातचीत की। उन्होंने बताया कि कैसे सीजफायर के दो महीने बाद तक वो पाक सैनिकों से लड़ते रहे। सिर्फ नमक वाले खजूर खाकर जिंदा रहे।आज पूरा देश 1971 में पाकिस्तान से युद्ध में मिली जीत की वर्षगांठ मना रहा है। तब भारत ने पाक को करारी शिकस्त देकर दुनियाभर में अपनी ताकत का डंका बजाया था। इस युद्ध के बाद ही बांग्लादेश का उदय हुआ था। उस दौरान की जंग के एक नायक हल्द्वानी निवासी नारायण दत्त भट्ट भी रहे, जिन्होंने भारतीय फौज के अन्य जाबांजों के साथ मिलकर सिर्फ खजूर खाकर दुश्मनों के दांत खट्टे किए थे। नारायण बताते हैं कि सीजफायर के दो महीने बाद तक वह बांग्लादेश में रहे और पाक से लड़ाई लड़कर दुश्मनों को खदेड़ा।हल्द्वानी काठगोदाम के हाइडिल गेट, शीशमहल निवासी 3-कुमाऊं रेजिमेंट में तैनात रहे नारायण दत्त भट्ट ने ‘हिन्दुस्तान’ से जंग के अनुभव साझा किए। वे बताते हैं कि अगरतला के धरमघर से होकर वह चटगांव पहुंचे थे। उनकी पल्टन के साथ ही 4-कुमाऊं, 12 कुमाऊं समेत कई बटालियन के जवान भी शामिल थे। 13 दिनों तक चले इस युद्ध में सैकड़ों जवान शहीद हुए। नारायण बताते हैं कि जंग के दौरान खाने के लाले थे। अचानक हमला हुआ था तो जल्दबाजी में उन्हें नमक से बने खजूरे दिए गए थे, जिन्हें खाकर ही उन्होंने शुरुआती दिन काटे क्योंकि राशन और अन्य सामान पहुंचने में समय लगा। इसके अलावा पानी भी बासी ही पीना पड़ता था। तब चढ़ाई चढ़ने के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। दस दिनों के बाद हवाई जहान से राशन और उसे बनाने के संसाधन पहुंचे थे।
बांग्लादेश में स्थानीय लोगों पर जुल्म ढहाते थे पाकिस्तानी
नारायण बताते हैं कि 16 दिसंबर 1971 को सीजफायर की घोषणा पाक की ओर से हुई। पर इसके बाद भी पाकिस्तानी बांग्लादेश के नवारखाली व अन्य हिस्सों में घुसकर लोगों पर जुल्म ढहाते थे। जिसे खत्म करने में दो माह लग गए। इसके बाद बांग्लादेश का उदय हुआ। दमुवाढूंगा निवासी केशर सिंह, दोनहरिया निवासी जीवन सिंह भी लड़ाई लड़े।परिवार रोता छोड़ निकले थे सूबेदार मेजर खड़क सिंह
रुद्रपुर। दिनेशपुर निवासी 75 वर्षीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह कार्की (सेनि.) भी 1971 के भारत-पाक युद्ध में शामिल रहे। नवंबर 1971 में वह दो माह की छुट्टी पर घर आए थे। उनकी शादी को अभी पांच दिन ही हुए थे कि टेलीग्राम के जरिए ड्यूटी पर लौटने का आदेश मिल गया। उन्होंने बताया कि उनकी यूनिट अरुणाचल प्रदेश के सिलचर में तैनात थी। उन्हाेंने बताया कि पाक सेना द्वारा बंदी बनाई महिलाओं और बच्चों को याद कर आज भी उनकी आंखें नम कर देता है।
भारत-पाक युद्ध में कैप्टन उमेद हुए थे शहीद
1971 में पाक से हुए युद्ध में सेना ने पराक्रम दिखाकर दुश्मन सेना को रौंद दिया था। इस युद्ध में चम्पावत जिले के एक आफिसर और 12 जवानों ने अपनी शहादत दी। शहीदों में जनकांडे निवासी कै. उमेद सिंह माहरा, मल्लाकोट के मान सिंह, चामी के जोध सिंह, कलीगांव के प्रताप सिंह, छंदा रेगड़ू के शिवराज सिंह, कमेला के केशव दत्त, मेदी ढेक के गंगा सिंह, बुंगली के हरी चंद आदि शामिल रहे।
