उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो
देर आए, दुरुस्त आए, आख़िरकार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच की सिफारिश करनी पड़ी। यह फैसला किसी सरकार की संवेदनशीलता का नहीं, बल्कि उत्तराखंड की संघर्षशील जनता और जन आंदोलनों के निरंतर दबाव का परिणाम है।उत्तराखंड क्रान्ति दल पिछले तीन वर्षों से सड़कों से लेकर न्यायालय तक, अंकिता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर अडिग संघर्ष करता रहा है। सत्ता के दबाव, चुप्पी और संरक्षण के बावजूद यह आंदोलन कभी कमजोर नहीं पड़ा।आज की यह सिफारिश उस सामूहिक संघर्ष की नैतिक जीत है, जिसमें उत्तराखंड की जागरूक जनता और अनेक सामाजिक संगठनों ने उक्रांद के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आवाज़ बुलंद की। इस न्याय की लड़ाई में सहभागी सभी जनों को हार्दिक बधाई।हम स्पष्ट करते हैं कि सीबीआई जांच केवल औपचारिकता न बने दोषियों को सज़ा और पर्दे के पीछे छिपे प्रभावशाली चेहरों का पर्दाफ़ाश ही अंकिता के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
