उत्तराखंड डेली न्यूज; ब्योरो

आज की अनियमित दिनचर्या, तनाव और गलत खानपान के कारण शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक समस्याएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधियों की कमी और मानसिक दबाव शरीर की ऊर्जा को कमजोर कर देते हैं।ऐसे में यदि योगासन को रोजमर्रा की दिनचर्या में शामिल किया जाए, तो शरीर और मन दोनों को संतुलित रखा जा सकता है। इन्हीं प्रभावशाली योगासनों में से एक है आकर्ण धनुरासन, जिसे तन और मन की शक्ति बढ़ाने वाला विशेष आसन माना जाता है।
आयुष मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त योग मुद्रा
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने आकर्ण धनुरासन को एक महत्वपूर्ण और उन्नत योग मुद्रा के रूप में रेखांकित किया है। मंत्रालय के अनुसार, यह आसन केवल शरीर को मजबूत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आंतरिक संतुलन, एकाग्रता और आत्मबल को भी बढ़ाता है। इस आसन में साधक की स्थिति एक धनुर्धर की तरह होती है, जो लक्ष्य पर पूरी एकाग्रता के साथ ध्यान केंद्रित करता है।
आकर्ण धनुरासन क्या है?
आकर्ण धनुरासन योग की एक उन्नत मुद्रा है, जिसमें शरीर धनुष के आकार में मुड़ता है और हाथ तीर खींचने की स्थिति में रहते हैं। यह आसन मांसपेशियों को मजबूती देने के साथ-साथ शरीर में लचीलापन भी बढ़ाता है। नियमित अभ्यास से शारीरिक सहनशक्ति बढ़ती है और मानसिक स्पष्टता विकसित होती है।
आकर्ण धनुरासन करने की सही विधि
इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल सीधा लेट जाएं। अब दाएं हाथ से दाएं पैर के बड़े अंगूठे को और बाएं हाथ से बाएं पैर के अंगूठे को पकड़ें। गहरी सांस लेते हुए धीरे-धीरे दोनों पैरों को ऊपर की ओर खींचें। साथ ही सिर और छाती को भी जितना संभव हो उतना ऊपर उठाएं। इस स्थिति में शरीर धनुष के समान दिखाई देगा।इस अवस्था को 15 से 30 सेकंड तक बनाए रखें और सामान्य गति से सांस लेते रहें। इसके बाद धीरे-धीरे शरीर को ढीला करते हुए शुरुआती स्थिति में लौट आएं। इस प्रक्रिया को अपनी क्षमता के अनुसार दोहराया जा सकता है।
आकर्ण धनुरासन के प्रमुख लाभ
आकर्ण धनुरासन के नियमित अभ्यास से पीठ, कंधे और छाती की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। यह रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है, जिससे पीठ दर्द और जकड़न में राहत मिलती है। पेट पर पड़ने वाले दबाव से पाचन तंत्र सक्रिय होता है और गैस, कब्ज जैसी समस्याओं में सुधार होता है। साथ ही जांघों, कूल्हों और पैरों की मांसपेशियों में खिंचाव आता है, जिससे शरीर की गतिशीलता बढ़ती है। मानसिक स्तर पर यह आसन एकाग्रता, आत्मविश्वास और मानसिक स्थिरता को मजबूत करता है।
सावधानियां और जरूरी सुझाव
विशेषज्ञों के अनुसार, आकर्ण धनुरासन एक उन्नत योगासन है, इसलिए शुरुआती लोग इसे योग प्रशिक्षक की निगरानी में ही करें। अभ्यास के दौरान शरीर पर अत्यधिक दबाव न डालें और किसी भी तरह का दर्द महसूस होने पर आसन तुरंत छोड़ दें। गर्भवती महिलाएं और गंभीर पीठ दर्द या चोट से पीड़ित लोग इसे करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
निष्कर्ष
आकर्ण धनुरासन शरीर और मन दोनों को संतुलित करने वाला एक शक्तिशाली योगासन है। नियमित और सही तरीके से अभ्यास करने पर यह शारीरिक शक्ति, मानसिक एकाग्रता और आत्मविश्वास को बढ़ाने में बेहद सहायक सिद्ध होता है।
