卐 ~ हिन्दू पंचांग ~ 卐
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⛅दिन – शनिवार
⛅विक्रम संवत् – 2082
⛅अयन – उत्तरायण
⛅ऋतु – वसंत
⛅ अमांत – 23 गते फाल्गुन मास प्रविष्टि
⛅ राष्ट्रीय तिथि – 15 फाल्गुन मास
⛅मास – चैत्र
⛅पक्ष – कृष्ण
⛅तिथि – चतुर्थी शाम 07:17 तक तत्पश्चात् पञ्चमी
⛅नक्षत्र – चित्रा सुबह 11:15 तक तत्पश्चात् स्वाती
⛅योग – वृद्धि प्रातः 06:52 तक तत्पश्चात् ध्रुव
⛅राहुकाल – सुबह 09:34 से सुबह 11:01 तक (हरिद्वार मानक समयानुसार)
⛅सूर्योदय – 06:39
⛅सूर्यास्त – 06:18 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त हरिद्वार मानक समयानुसार)
⛅दिशा शूल – पूर्व दिशा में
⛅ब्रह्ममुहूर्त – प्रातः 05:06 से प्रातः 05:55 तक (हरिद्वार मानक समयानुसार)
⛅अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:14 से दोपहर 01:02 (हरिद्वार मानक समयानुसार)
⛅निशिता मुहूर्त – वोमध्यरात्रि 12:13 से मध्यरात्रि 01:02 तक (हरिद्वार मानक समयानुसार)
🌥️व्रत पर्व विवरण – सर्वार्थसिद्धि योग (सुबह 11:15 से सूर्योदय 8 मार्च तक)
🌥️विशेष – चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)
🔹सुपाच्य एवं बलवर्धक ज्वार🔹
🔸आयुर्वेद के अनुसार ज्वार शीतल, रुक्ष, पचने में हलकी, किंचित् वीर्यवर्धक तथा मूत्रजनन है । यह रक्तविकार एवं प्रकुपित कफ-पित्त को दूर करने में सहायक है । यह दो प्रकार की होती है – सफेद व लाल । सफेद ज्वार स्वास्थ्य के लिए विशेष हितकर एवं बलप्रद है ।
🔸यह बवासीर, घाव और अरुचि में गुणकारी है । (वसंत ऋतु -19 फरवरी से 19 अप्रैल) में कफ का प्रकोप होता है । अतः कफशमन हेतु होली के दिनों में ज्वार की धानी तथा भुने हुए चने खाने का रिवाज है । इस ऋतु में ज्वार का सेवन हितकारी है ।
🔸ज्वार में विटामिन बी-१, बी-२, बी- ३, बी-५, बी-६, बी-७, बी-९, ‘ए’, ‘ई’ तथा फॉस्फोरस, पोटैशियम, मैग्नेशियम, लौह व जिंक आदि पोषक तत्त्व प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं ।
🔹विभिन्न रोगों में लाभकारी🔹
(१) ज्वार कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखने में सहायक है ।
(२) इसमें रेशे की मात्रा अधिक है तथा इसका ग्लायसेमिक इंडेक्स (GI) कम है अर्थात् ज्वार रक्त शर्करा (blood sugar) को तेजी से व अधिक मात्रा में नहीं बढ़ाती । अतः यह मधुमेह (diabetes) में खूब लाभकारी है । मधुमेह में गेहूँ व चावल का सेवन बंद कर ज्वार की रोटी खाने से रक्त शर्करा आसानी से नियंत्रित रहती है ।
(३) ज्वार में कैंसर-विरोधी घटक पाये जाते हैं। अनुसंधानों के अनुसार गेहूँ और मक्के की तुलना में ज्वार का सेवन करनेवालों में कमी देखी गयी ।
(४) मोटापा एक गम्भीर समस्या है जो मधुमेह और हृदयरोग जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है । ज्वार में रेशे की अधिक मात्रा होने तथा यह शीघ्र तृप्तिदायक होने से मोटापे से रक्षा करती है ।
🔸ज्वार के आटे की रोटी बनायी जाती है तथा ज्वार का दलिया, खिचड़ी व अन्य कई प्रकार के व्यंजन भी बनाएं
