उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
अज्ञेय महज 18 साल की उम्र में चंद्रशेखर आजाद की टीम से जुड गए थे. उन्होंने भगत सिंह को जेल से छुड़ाने का एक बड़ा प्लान बनाया था. भगत सिंह को भगाने के लिए एक ट्रक का इस्तेमाल होना था. इस ट्रक की स्टेयरिंग अज्ञेय को ही संभालनी थी. ड्राइविंग सीखने के लिए उन्हें सिर्फ पांच दिन का समय मिला था. उनके अंदर देशभक्ति का जुनून सवार था. इसलिए उन्होंने महज तीन दिन में ही ट्रक चलाना सीख लिया था.हाथों ने बहुत अनर्थ किए, पग ठौर-कुठौर चले. मन के आगे भी खोटे लक्ष्य रहे, वाणी ने (जाने अनजाने) सौ झूठ कहे. पर आंखों ने हार, दुख, अवसान, मृत्यु का, अंधकार भी देखा तो सच-सच देखा.” हिंदी साहित्य में जब भी नए प्रयोगवादी कवि की बात होती है तो सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ का नाम सबसे पहले याद आता है. कविता, उपन्यास, निबंध और पत्रकारिता, हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाले ‘अज्ञेय’ ने हिंदी साहित्य को परंपरागत रास्तों से हटाकर प्रयोगवाद चेतना की नई दिशा दी.
