उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
भारतीय नौसेना ने आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम उठाते हुए MiG-29K लड़ाकू विमानों के अहम टेस्टिंग सिस्टम भारत में ही बनाने का फैसला किया है। जानें कैसे विदेशी निर्भरता खत्म कर ‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बढ़ावा।भारतीय नौसेना ने आत्मनिर्भरता और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए एक बेहद अहम कदम उठाया है। नौसेना ने अपने रूसी मूल के MiG-29K लड़ाकू विमानों के लिए महत्वपूर्ण उपकरणों और टेस्टिंग सिस्टम को देश में ही विकसित करने और बनाने के लिए भारतीय कंपनियों को आमंत्रित किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य विदेशी सप्लायर्स पर निर्भरता को कम करना, विमानों को हमेशा उड़ान के लिए तैयार रखना और रक्षा उपकरणों के मामले में भारत को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना है।MiG-29K की अहमियत और मौजूदा चुनौतियां,MiG-29K क्या है? यह एक बेहद आधुनिक, हर मौसम में उड़ान भरने वाला सुपरसोनिक यानी आवाज की गति से भी तेज मल्टी-रोल फाइटर जेट है। यह भारतीय नौसेना का मुख्य लड़ाकू विमान है जो विमानवाहक पोतों से संचालित होता है। कहां तैनात है? यह विमान भारत के दो प्रमुख विमानवाहक पोतों- INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत से उड़ान भरता है।
भूमिका: इसका मुख्य काम हवाई दबदबा बनाना, समुद्री हमले करना, दुश्मन को समुद्र में घुसने से रोकना और युद्धपोतों के पूरे बेड़े (कैरियर बैटल ग्रुप) की सुरक्षा करना है।चुनौती क्या थी? भारतीय नौसेना को लंबे समय से इस विमान के रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स की कमी और इसकी सर्विसिंग को लेकर रूसी कंपनियों पर निर्भरता के कारण कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था।नौसेना ने क्या कदम उठाया है? भारतीय नौसेना ने एक RFI (रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन) जारी किया है। इसके तहत देश की प्रतिष्ठित और तकनीकी रूप से सक्षम भारतीय कंपनियों से आवेदन मांगे गए हैं। नौसेना चाहती है कि ये कंपनियां MiG-29K विमानों के लिए दो खास तरह के ऑटोमेटेड टेस्ट सिस्टम (जांच प्रणाली) का स्वदेशी डिजाइन तैयार करें और उन्हें विकसित करें:
NASK 1-29K: ग्राउंड ऑटोमेटेड टेस्ट सिस्टम (जमीन/बेस पर जांच करने वाली प्रणाली)
KSAK 1-29K: कैरियर बेस्ड ऑटोमेटेड टेस्ट सिस्टम (समुद्र में विमानवाहक पोत पर जांच करने वाली प्रणाली)
ये टेस्टिंग सिस्टम (NASK और KSAK) क्या काम करेंगे?
इन दोनों सिस्टम का इस्तेमाल विमान के नियमित और निर्धारित रखरखाव के लिए किया जाता है। इनकी मदद से विमान के लगभग हर अहम हिस्से की गहराई से टेस्टिंग की जाती है, जैसे:
इंजन और पावर: विमान के इंजन के मापदंडों और इलेक्ट्रिकल पावर जेनरेशन सिस्टम की जांच।इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम: फ्यूल (ईंधन) सिस्टम, एयर डेटा सिस्टम, एवियोनिक्स और ‘फ्लाई बाय वायर’ (उड़ान नियंत्रण) सिस्टम का परीक्षण।
रडार: रडार के विभिन्न मोड और उसके पुर्जों की सही कार्यप्रणाली की जांच।
हथियार प्रणाली: विमान में मिसाइल या बम लोड करने से पहले आर्मामेंट (हथियार) सिस्टम की पूरी टेस्टिंग करना।इस कदम से भारत को क्या फायदा होगा?
ये स्वदेशी टेस्टिंग सिस्टम यह सुनिश्चित करेंगे कि विमानवाहक पोतों पर तैनात MiG-29K हर समय युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार रहें। इस प्रोजेक्ट में प्राइवेट कंपनियां रक्षा क्षेत्र की सरकारी कंपनियों और रिसर्च संस्थानों के साथ मिलकर काम कर सकती हैं, जिससे देश की स्वदेशी निर्माण क्षमता मजबूत होगी। पुर्जों और जांच प्रणालियों की सप्लाई चेन जब पूरी तरह से भारत के नियंत्रण में होगी, तो इससे किसी भी आपात स्थिति में विदेशी निर्भरता खत्म होगी और राष्ट्रीय सुरक्षा ज्यादा पुख्ता होगी।
