उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो
बगैर भंसार के भारतीय वाहनों एवं समानों के नेपाल में आवाजाही पर रोक लगाए जाने के विरोध में ग्रामीणों के आंदोलन का आखिरकार असर हो गया। नेपाल के पर्सा जिला क्षेत्र संख्या-4 के सांसद टेकबहादुर शाक्य की पहल से मंगलवार की शाम से भिस्वा बार्डर पर डिजिटल भंसार कार्यालय का संचालन शुरू हो गया।भारत-नेपाल सीमा पर स्थित भिस्वा बॉर्डर से अब भारतीय वाहनों का नेपाल जाना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। सीमावर्ती तराई क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होने से खुशी है।डिजिटल भंसार कार्यालय शुरू होने के बाद अब भारतीय चारपहिया वाहनों की एंट्री और भंसार की प्रक्रिया भिस्वा बॉर्डर पर ही पूरी की जाएगी। भारतीय वाहन केवल एंट्री कराकर सीमा से लगभग नौ किलोमीटर तक नेपाल में बिना किसी शुल्क के आ-जा सकेंगे। पहले इसके लिए लोगों को वीरगंज जाना पड़ता था, जिससे समय और पैसे दोनों की अतिरिक्त खर्च होती थी।ग्रामीणों ने सांसद के प्रयास को सराहा,स्थानीय लोगों ने इस सुविधा के लिए सांसद टेकबहादुर शाक्य और नेपाल सरकार का आभार जताया है। आंदोलन में शामिल प्रदीप पटेल, अरमान खां, ताराचंद पंडित, शाहरुख और सरोज कुमार ने बताया कि यह उनके लंबे आंदोलन का परिणाम है। उन्होंने कहा कि सांसद ने इस मुद्दे को संसद में प्रभावी ढंग से उठाया, जिसके बाद इसे लागू किया गया।
भारतीय वाहनों को नहीं मिलती थी अनुमति
पहले सिकटा बाजार से लोग सीमित मात्रा में भी खाद्यान्न लेकर नेपाल नहीं जा पाते थे। नेपाल सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) सामान और वाहनों को सीमा पर ही रोक देता था। शादी-विवाह जैसे पारिवारिक आयोजनों में भी भारतीय वाहनों को नेपाल में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलती थी।बहू-बेटियों और अन्य यात्रियों को बॉर्डर पर उतरकर ई-रिक्शा या दूसरे वाहनों से गंतव्य तक जाना पड़ता था या फिर वीरगंज जाकर भंसार की औपचारिकता पूरी करनी पड़ती थी। हालांकि स्कूल बसों और एम्बुलेंस को पहले से छूट प्राप्त थी, लेकिन अब आम लोगों को भी बड़ी राहत मिली है।
