उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो
उत्तराखंड के ज्वलंत और संवेदनशील मुद्दों को लेकर भैरव सेना संगठन लगातार मुखर होकर संघर्ष कर रहा है। इसी क्रम में आज देहरादून के लैंसडाउन चौक पर संगठन द्वारा जोरदार प्रदर्शन किया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने उग्र नारेबाजी करते हुए पुतला दहन किया और मांग की कि संबंधित विवादित मूर्तियां अति शीघ्र हटाई जाएं। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष अनिल कुमार द्वारा की गई।पूरा प्रकरण और पूर्व में हुए विरोध प्रदर्शन,संगठन ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2022 से चंदा-व्यवसायीकरण के अंतर्गत जीर्णोद्धारकर्ता विश्वनाथ कराड द्वारा श्री बदरीनाथ धाम के अंतर्गत आने वाले माणा गांव में मृतक मानव मूर्तियां स्थापित की गई हैं। इन मूर्तियों में मौखिक रूप से 29 करोड़ के दानदाता की स्वर्गीय बहन प्रयाग अक्का, स्वर कोकिला लता मंगेशकर तथा महाराष्ट्र प्रांत के सम्मानित संतों—संत तुकाराम:, संत ज्ञानेश्वर सहित अन्य की मूर्तियां शामिल हैं। सनातन धर्म में आराध्य देवी-देवताओं के साथ मृतक मनुष्यों की मूर्तियां रखना पूरी तरह निषेध माना गया है।वर्ष 2024 में संगठन की पूर्व घोषणा के अनुसार इन मूर्तियों को हटाने के लिए जब देहरादून से कार्यकर्ता कूच कर रहे थे, तो चमोली पुलिस-प्रशासन ने भारी घेराबंदी कर गौचर में भैरव सेना के कार्यकर्ताओं को रोक दिया और उन्हें माणा गांव नहीं जाने दिया गया। हालांकि, संगठन के भारी विरोध के चलते पृथक-पृथक पुलिस जांच में प्रकरण की सत्यता उजागर हुई और संगठन के आरोपों की पुष्टि हुई।इसके पश्चात, ग्राम प्रधान पीतांबर मोल्फा ने भैरव सेना को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि विवाद सुलझाया जा रहा है, अतः आंदोलन समाप्त कर दिया जाए। परंतु, 2 वर्ष बीतने को आए हैं और अभी तक वे विवादित मृतक मूर्तियां वहां से नहीं हटाई गई हैं। सनातन परंपराओं के साथ इस प्रकार का खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
संगठन के केंद्रीय सचिव संजय पवार ने प्रशासन की इस ढिलाई और वादाखिलाफी के कारण टूक शब्दों मे संगठन के ‘प्लान बी’ पर कड़ाई से विचार करने की योजना से अवगत कराया। प्लान बी के तहत, संगठन उत्तराखंड की ऐतिहासिक धरोहर और संस्कृति के प्रतीक, टिहरी रियासत के महाराज (जिन्हें ‘बोलदा बद्रीनाथ’ की उपाधि से अलंकृत किया गया था) तथा दर्जन भर से अधिक सामाजिक राजनितिक विभूतियों की भव्य मूर्ति वहां स्थापित किए जाने की पुरजोर मांग करता है। क्योंकि जब मोक्ष धाम को पितांबर मोल्फा पितृ भूमि बनाना ही चाहता है तो हम भी उसमें योगदान देंगे। यदि तय समय सीमा के भीतर वे विवादित मृतक मूर्तियां वहां से नहीं हटाई गईं, तो संगठन प्रदेश हित और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिए एक बार फिर उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होगा।संगठन मंत्री गणेश जोशी ने शासन-प्रशासन से आग्रह किया कि सनातन परंपराओं और जनभावनाओं की अनदेखी न की जाए, अन्यथा उत्पन्न होने वाली हर स्थिति की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थिति संजय पवार (केंद्रीय सचिव), मयंक मलिठा (प्रदेश अध्यक्ष, युवा मोर्चा), अनु राजपूत, अमन राजपूत, गौरी कोठियाल, सुनीता थापा, गीता बिष्ट, कल्पना भंडारी, अनिल गुप्ता इत्यादि रहे।
