उत्तराखंड डेली न्यूज:ब्योरो
विधायक अनिल नोटियाल के आश्वासन के बाद भी गांव तक नहीं पहुंची सड़क, 1984 से कर रहे मांग; 9 किमी पैदल दूरी तय करने को मजबूर
कर्णप्रयाग। सड़क की मांग को लेकर वर्षों से शासन-प्रशासन के चक्कर काट रहे ग्राम सभा खरसाई के सकंड तोक के ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे गया है। वर्ष 1984 से गांव को सड़क से जोड़ने की मांग पूरी नहीं होने पर ग्रामीणों ने अब खुद ही गैंती-फावड़ा उठा लिया है। ग्रामीण अपने संसाधनों से सड़क की कटिंग में जुट गए हैं।ग्राम प्रधान शिवानी चौधरी के नेतृत्व में वीरेंद्र सिंह, दाताराम, देवली, रघुवीर सिंह, गजेंद्र सिंह, उषा देवी और सरस्वती देवी समेत अन्य ग्रामीण सड़क निर्माण में जुटे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव को सड़क से जोड़ने के लिए कई बार सर्वे हुए, लेकिन हर बार मामला कागजों तक ही सीमित रह गया। सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को आज भी करीब नौ किलोमीटर की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है।ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की मांग को लेकर उन्होंने पांच और छह जनवरी को आंदोलन भी किया था। विधायक अनिल नौटियाल के आश्वासन पर ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त कर दिया था। ग्रामीणों के अनुसार विधायक ने तीन माह के भीतर सड़क का सर्वे कराने और जल्द ही सड़क कटिंग का काम शुरू कराने का भरोसा दिया था, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
वन भूमि पर हो रहा सड़क निर्माण
उपजिलाधिकारी कर्णप्रयाग अल्केश नौटियाल ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा अपने संसाधनों से सड़क निर्माण किए जाने का मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर ग्रामीण सड़क की कटिंग कर रहे हैं, वह वन भूमि के अंतर्गत आता है। मामले में संबंधित विभागों से आवश्यक जानकारी ली जा रही है।वहीं ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनकी वर्षों पुरानी मांग पर समय रहते कार्रवाई की गई होती तो उन्हें खुद सड़क बनाने के लिए गैंती-फावड़ा उठाने की जरूरत नहीं पड़ती। ग्रामीणों ने कहा कि सड़क उनके लिए सुविधा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरत बन चुकी है।
2027 में चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि यदि विधानसभा चुनाव से पहले गांव तक सड़क नहीं पहुंची तो वे 2027 के विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे। ग्रामीणों ने कहा कि चुनाव बहिष्कार की स्थिति में इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।यह संस्करण प्रेस रिलीज जैसा कम और मैदानी अखबार की बड़ी खबर जैसा ज्यादा रखा गया है।
