उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो

बद्रीनाथ धाम में एक विशेष परंपरा है जिसके अनुसार, जो भक्त कपाट बंद होने के समय धाम में उपस्थित होता है, उसे अगले वर्ष भी बद्रीनाथ आना होता है। इस परंपरा का गहरा महत्व है और भक्त इसे भगवान बद्री विशाल का बुलावा मानते हैं। कपाट बंद होने का समय बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, और इस समय उपस्थित भक्तों को विशेष आशीर्वाद मिलता है।श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद इस वर्ष की चारधाम यात्रा का समापन हो गया है। गौरतलब है कि श्री केदारनाथ धाम तथा श्री यमुनोत्री धाम के कपाट भैया दूज यानि 23 अक्टूबर तथा श्री गंगोत्री धाम के कपाट 22 अक्टूबर को शीतकाल के लिए बंद हो गए थे। मंगलवार को बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के दौरान पांच हजार से अधिक श्रद्धालु इसके साक्षी बने हैं। श्रद्धालुओं ने नारायण से बिछुड़ने का गम साफ दिख रहा था।बदरीनाथ धाम में परंपरा है कि श्रद्धालु अगर कपाट बंद होने के उत्सव में शामिल होता है तो उसे नारायण के कपाट खुलने की तिथि पर भी अगले साल उपस्थित रहना होता है।
आईटीबीपी ने संभाला बदरीनाथ धाम की सुरक्षा का जिम्मा
बदरीनाथ धाम की सुरक्षा में यात्राकाल के दौरान पुलिस व पीएसी तैनात होती है। लेकिन शीतकाल में धाम की सुरक्षा का जिम्मा आईटीबीपी को सौंपा जाता है। भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल की एक प्लाटून बदरीनाथ धाम में सुरक्षा का जिम्मा संभाल लिया है। पुलिस उपाधीक्षक मदन सिंह बिष्ट ने बताया कि आईटीबीपी अब शीतकाल में बदरीनाथ मंदिर की सुरक्षा का जिम्मा संभाल चुकी है। कहा कि एक प्लाटून आईटीबीपी के जवान बदरीनाथ में पहुंच चुके हैं। शीतकाल में सशस्त्र जवान 24 घंटें मंदिर की सुरक्षा में लगे रहते हैं।
महायोजना का कार्य जारी
शीतकाल में भी बदरीनाथ महायोजना के कार्य चल रहे हैं। जिसमें इंजीनियिर ,कर्मचारी, मजदूर ,बदरीनाथ धाम में मौजूद हैं। रणनीति है कि धाम में बर्फबारी तक बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान के कार्य किए जाए। वर्तमान समय में रीवर फ्रंट,सहित अन्य कार्य किए जा रहे हैं। महायोजना का कार्य कर रहे लोक निर्माण विभाग पीआईयू के अधिशासी अभियंता योगेश मनराल ने कहा कि वर्तमान समय में बदरीनाथ् धाम में पांच सौ से अधिक कर्मचारी, अधिकारी ,मशीन आपरेटर,मजदूर कार्य कर रहे हैं। कहा कि बर्फबारी तक कार्य को किए जाने की रणनीति है।
