उत्तराखंड डेली न्यूज़ :ब्योरो

पुलिस ने कहा, यह बात स्पष्ट नहीं है कि जिन महिलाओं से इस बारे में पूछताछ की गई, वे किस आयु वर्ग की थीं। क्या वे कामकाजी महिलाएं थीं, कॉलेज जाने वाली छात्राएं थीं, गृहिणियां थीं, पर्यटक थीं या वरिष्ठ नागरिक थीं।’हाल ही में प्रकाशित हुई एक सर्वे रिपोर्ट में उत्तराखंड के देहरादून शहर को महिलाओं के लिए 10 सबसे असुरक्षित शहरों में से एक बताया गया था। अब इस रिपोर्ट को लेकर उत्तराखंड पुलिस एक्शन में आ गई है और उसने इसे जारी करने वाली निजी कंपनी को समन जारी किया है। इस बारे में जानकारी देते हुए देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अजय सिंह ने कहा कि इस रिपोर्ट के आने के बाद शहर की छवि को धक्का पहुंचा है और कई अभिभावक जिनकी बेटियां इस शहर में पढ़ रही हैं, उन्हें अपनी बेटियों की चिंता सताने लगी है। इस रिपोर्ट को लेकर शहर के होटल कारोबारियों में भी गुस्सा है, क्योंकि इससे शहर का पर्यटन प्रभावित हो रहा और उनकी बुकिंग्स पर भी इसका असर दिख रहा है। उधर रिपोर्ट तैयार करने वाली टीम और सर्वेक्षण करने वाली कंपनी पी वैल्यू एनालिटिक्स के प्रबंध निदेशक को एक हफ्ते के भीतर यह बताने के लिए तलब किया गया है कि उन्होंने किस आधार पर अपने दावे किए हैं।पुलिस अधिकारी ने आगे कहा कि, ‘यह समन केवल पूछताछ के मकसद से भेजा गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने सर्वेक्षण कैसे किया और उनका टारगेट ग्रुप कौन था, और इन जैसे अन्य सवालों के जवाब मिल सके।’ उन्होंने रिपोर्ट में बहुत सी तथ्यात्मक गलतियां होने का दावा भी किया।समन जारी होने से एक दिन पहले कंपनी के प्रतिनिधि मयंक धैय्या ने मंगलवार को एसएसपी ऑफिस में पेश होकर उन्हें कंपनी की तरफ से सफाई भी दी थी। उसने बताया था कि यह सर्वे विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए शोध के उद्देश्य से किया गया था। साथ ही उसने बताया कि इस सर्वे को पूरा करने में दो टीमों ने अपना योगदान दिया। जिनमें से एक का काम डेटा संग्रह करना था और दूसरी का काम डेटा विश्लेषण करना था। हालांकि, पुलिस का कहना है कि धैय्या के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। एसएसपी सिंह ने आगे कहा कि फर्म को समन इसलिए जारी किया गया है क्योंकि सर्वे रिपोर्ट से जुड़े कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं, जिससे इसकी सच्चाई पर शक होता है। उन्होंने कहा, जैसे यह बात अस्पष्ट है कि जिन महिलाओं से इस बारे में पूछताछ की गई, वे किस आयु वर्ग की थीं। क्या वे कामकाजी महिलाएं थीं, कॉलेज जाने वाली छात्राएं थीं, गृहिणियां थीं, पर्यटक थीं या वरिष्ठ नागरिक थीं।’अधिकारी ने कहा कि रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े भी काफी भ्रामक हैं, क्योंकि उसमें दावा किया गया है कि देहरादून में सिर्फ 33 प्रतिशत महिलाएं हीं पुलिस गश्त से संतुष्ट हैं, लेकिन इसी मानदंड पर 11 प्रतिशत महिलाओं वाला शहर महिला सुरक्षा के मामले में देहरादून से बेहतर बताया गया है।एसएसपी ने कहा कि सर्वेक्षण के माध्यम से इस तरह की नकारात्मक धारणा बनाने से उन अभिभावकों में अनावश्यक घबराहट पैदा हो सकती है जिनकी बेटियां इस शहर में पढ़ रही हैं। सिंह ने आगे कहा, ‘हालांकि मैं ऐसे सभी लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि देहरादून महिलाओं के लिए एक सुरक्षित शहर है। यहां संकट में फंसी महिलाओं के लिए एक टोल-फ्री नंबर 112 है, जिसका रिस्पॉन्स समय 14 मिनट से भी कम है।’पुलिस अधिकारी ने शहर की चौकस कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा के लिए किए गए इंतजामों के बारे में आगे जानकारी देते हुए बताया कि शहर की सड़कों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने के लिए 14,000 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। साथ ही महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाए गए गौर शक्ति ऐप को 16,000 महिलाओं ने डाउनलोड किया है।उन्होंने आगे कहा कि देहरादून के होटल एसोसिएशन ने इस रिपोर्ट पर नाराजगी व्यक्त की है क्योंकि इससे देहरादून की छवि को नुकसान पहुंचा है और उनकी होटल बुकिंग प्रभावित हुई है। एसएसपी ने कहा कि अगर कंपनी एक सप्ताह के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं देती है या उनके द्वारा दिए गए तथ्य निराधार पाए जाते हैं, तो उसके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
