उत्तराखंड डेली न्यूज़: ब्योरो

हिमाद्रि फाउंडेशन की यह मुहिम ऋषिकेश को स्वच्छ और सुंदर बनाने में मिसाल कायम कर रही है. इस प्रयास से न सिर्फ पर्यटक बल्कि स्थानीय लोग भी प्रेरित हो रहे हैं. स्वच्छ शहर न केवल पर्यटन को बढ़ावा देता है बल्कि गंगा की पवित्रता को भी बनाए रखता है।ऋषिकेश एक आध्यात्मिक और पर्यटन नगरी है, जहां हर साल लाखों लोग घूमने आते हैं. गंगा किनारे की खूबसूरती, योग और आध्यात्मिक वातावरण इसे खास बनाते हैं. लेकिन पर्यटकों के जाने के बाद शहर अक्सर गंदगी और कचरे से भर जाता है, जो इसकी स्वच्छता और सुंदरता के लिए गंभीर चुनौती बन जाता है. इसी चुनौती को अवसर में बदलने का बीड़ा हिमाद्रि फाउंडेशन ने उठाया है।ऋषिकेश में हर सीजन में पर्यटकों की भीड़ उमड़ती है. उनके जाने के बाद प्लास्टिक, पानी की बोतलें, खाने के पैकेट और अन्य कचरा जगह-जगह फैला दिखाई देता है. यह न केवल शहर की खूबसूरती को बिगाड़ता है बल्कि गंगा की पवित्रता पर भी असर डालता है. स्थानीय प्रशासन की कोशिशें अक्सर पर्याप्त नहीं हो पातीं, जिससे स्वच्छता बनाए रखना और कठिन हो जाता है।हिमाद्रि फाउंडेशन ने इस समस्या को गंभीरता से समझते हुए सफाई अभियान शुरू किया. संस्था के स्वयंसेवक हर सप्ताह शहर के अलग-अलग हिस्सों में सफाई के लिए जुटते हैं. वे न केवल गंदगी हटाते हैं बल्कि लोगों को जागरूक भी करते हैं कि कचरा सही जगह डालें. इस पहल से न सिर्फ सड़कें और गलियां साफ दिखती हैं, बल्कि स्थानीय लोग भी स्वच्छता के महत्व को समझने लगे हैं।गंगा किनारे सबसे ज्यादा गंदगी देखने को मिलती है. श्रद्धालु और पर्यटक पूजा सामग्री, प्लास्टिक और अन्य सामान गंगा में या किनारे छोड़ देते हैं. हिमाद्रि फाउंडेशन के स्वयंसेवक सुबह-सुबह घाटों पर जाकर सफाई करते हैं. वे गंदगी को इकट्ठा कर उचित जगह निस्तारित करते हैं. इस काम से गंगा की स्वच्छता और पवित्रता बनी रहती है, और लोगों को भी समझाया जाता है कि गंगा में कचरा न डालें।ऋषिकेश की गलियां और बाजार भी कचरे से अछूते नहीं रहते. पर्यटक खाने-पीने के बाद रैपर और कप गली में फेंक देते हैं. फाउंडेशन की टीम इन जगहों पर जाकर सफाई करती है और दुकानदारों तथा राहगीरों से अपील करती है कि डस्टबिन का प्रयोग करें. इस जागरूकता से धीरे-धीरे लोग जिम्मेदारी समझने लगे हैं. बाजारों में साफ-सफाई से न सिर्फ वातावरण बेहतर हुआ है बल्कि व्यापारियों का भरोसा भी बढ़ा है।सिर्फ गंदगी उठाना ही काफी नहीं होता. हिमाद्रि फाउंडेशन कचरे के प्रबंधन पर भी ध्यान दे रहा है. वे गीले और सूखे कचरे को अलग करते हैं और रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया अपनाते हैं. इससे पर्यावरण पर बोझ कम होता है और संसाधनों का सही उपयोग हो पाता है. यह पहल शहर में आधुनिक कचरा प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।फाउंडेशन का मानना है कि केवल स्वयंसेवकों से काम पूरा नहीं हो सकता. इसलिए वे स्थानीय लोगों और पर्यटकों को भी इस अभियान से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. स्कूलों, कॉलेजों और संस्थाओं में स्वच्छता पर कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं, जिससे नई पीढ़ी को स्वच्छता का महत्व समझ में आता है. लोगों की भागीदारी से यह पहल और भी मजबूत बन रही है.
