उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो

नैनीताल हाईकोर्ट में अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई हुई. यह अवमानना वन विभाग के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के पेंशन मामले से जुड़ा हुआ है!
नैनीताल:पूर्व के आदेश का अनुपालन न करने के मामले में दायर कई अवमानना याचिकाओं पर नैनीताल हाईकोर्ट में एक साथ सुनवाई हुई. मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ ने प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु, पीसीसीएफ हॉफ समीर सिन्हा समेत कुमाऊं रेंज के विभागाध्यक्ष एवं अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने को कहा है. अब पूरे मामले की अगली सुनवाई 3 हफ्ते बाद होगी. वन विभाग के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का पेंशन मामला:दरअसल, अवमानना याचिकाओं में कहा गया है कि वे उत्तराखंड वन विभाग में साल 1986 से लेकर कई सालों तक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के रूप में कार्य कर रहे थे. राज्य के विभाजन होने के बाद उनको समय-समय पर वन विभाग की ओर से नियमित किया गया. अब विभाग उनको सेवानिवृत्ति के समस्त लाभ ये कहते हुए नहीं दे रहा है कि उनकी नियमित की गई सेवा का कार्यकाल पेंशन के लिए कम पड़ रही है!साल 1986 से नियमित सेवा दे रहे कर्मचारी:पेंशन पाने के लिए नियमित सेवा में होना आवश्यक है. जबकि, याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे साल 1986 से नियमित सेवा दे रहे हैं. उनकी पूरी सेवाओं को जोड़ते हुए उन्हें पेंशनरी बेनिफिट के समस्त लाभ दिए जाएं. वे भी राज्य कर्मचारी हैं, चाहे वे बाद में नियमित हुए हों. कोर्ट ने भी कई बार इस संबंध में सरकार को निर्देश दिए हैं कि उन्हें इसका लाभ दिया जाए!इससे पहले हाईकोर्ट ने दिया था ये आदेश: मामले में 5 सितंबर 2024 को हाईकोर्ट ने आदेश देते हुए कहा था कि उनकी पूर्व में की गई सेवाओं को जोड़ते हुए उन्हें रिटायरमेंट के सभी लाभ दें, लेकिन अभी तक सरकार ने उनकी पूर्व में की गई सेवाओं को नहीं जोड़ा है. उनका कहना है कि जब से वे नियमित हुए हैं, उसी के आधार पर उन्हें सेवानिवृत्त के लाभ दिया जा रहा है. अब 3 हफ्ते बाद फिर से सुनवाई होगी!
