उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो

देहरादून: उत्तराखंड वन विभाग में लंबे समय से पुनर्गठन को लेकर चर्चाएं चल रही हैं. विभागीय ढांचे में बदलाव को लेकर शासन स्तर पर मंथन जारी है और इसके लिए फाइलों में नए खाके पर काम भी शुरू कर दिया गया है. हालांकि अभी तक सरकार और शासन किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं, लेकिन प्रस्तावित पुनर्गठन को लेकर वन विभाग के कर्मचारियों के बीच आशंकाएं तेज हो गई हैं.फिलहाल यह पूरा मामला प्रस्ताव के स्तर पर है और शासन इस पर गंभीरता से विचार कर रहा है. पुनर्गठन से जुड़े सभी पहलुओं की गहन समीक्षा की जा रही है. यह देखा जा रहा है कि इस बदलाव से वन विभाग की मौजूदा दिक्कतें किस हद तक कम हो सकती हैं और क्या इससे पर्यावरण संरक्षण, वन प्रबंधन और वन्यजीवों की सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा. शासन स्तर पर समीक्षा के बाद यह प्रस्ताव कार्मिक विभाग और फिर कैबिनेट के सामने जाएगा, जहां अंतिम निर्णय लिया जाना है.हालांकि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन ईटीवी भारत में पुनर्गठन से जुड़ी खबर सामने आने के बाद विभागीय कर्मचारियों के बीच चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. कर्मचारी संभावित फायदे और नुकसान दोनों पर मंथन कर रहे हैं. इसी क्रम में अब कर्मचारियों ने पुनर्गठन से होने वाले संभावित नुकसान को लेकर खुलकर विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है. कर्मचारियों का कहना है कि यदि विभाग में बड़े स्तर पर पुनर्गठन किया जाना है, तो इससे पहले उनकी राय और सुझाव भी लिए जाने चाहिए, क्योंकि इसका सीधा असर उनके कार्यक्षेत्र, पदोन्नति और तैनाती पर पड़ेगा.पुनर्गठन का फैसला कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है, इसलिए बिना संवाद के कोई भी निर्णय लेना उचित नहीं होगा. कर्मचारियों को आशंका है कि पुनर्गठन के बाद उनके करियर के अवसर सीमित हो सकते हैं.दरअसल माना जा रहा है कि पुनर्गठन के बाद प्रदेश में वन विभाग के डिवीजनों की,लगभग 10 तक संख्या घट सकती है. इसके साथ ही टेरिटोरियल और नॉन-टेरिटोरियल डिवीजन की मौजूदा व्यवस्था समाप्त कर सभी डिवीजनों को टेरिटोरियल के रूप में स्थापित किया जा सकता है. इस संभावित बदलाव को लेकर SDO स्तर के अधिकारियों में खास चिंता देखी जा रही है. उन्हें डर है कि नॉन-टेरिटोरियल डिवीजन में DFO या प्रभारी DFO बनने के जो अवसर अभी मिलते हैं, वे नई व्यवस्था में खत्म हो जाएंगे.इसी तरह डिप्टी रेंजर्स को भी रेंज का चार्ज मिलने में दिक्कत आने की आशंका है. कर्मचारियों का यह भी कहना है कि यदि डिवीजनों की संख्या कम होती है, तो स्वाभाविक रूप से रेंज की संख्या भी घट सकती है. ऐसी स्थिति में रेंजर्स के लिए फील्ड पोस्टिंग पाना मुश्किल हो जाएगा, जिससे उनके कार्य अनुभव और प्रोन्नति पर असर पड़ सकता है.वन विभाग के पुनर्गठन का प्रस्ताव अभी विचाराधीन है, लेकिन इससे जुड़े संभावित बदलावों ने कर्मचारियों के बीच चिंता और असंतोष को जन्म दे दिया है. अब सबकी निगाहें शासन और सरकार के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं, साथ ही यह भी देखा जाएगा कि क्या इस प्रक्रिया में कर्मचारियों को विश्वास में लिया जाता है या नहीं.
