उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो
लातेहार जिले में पेसा नियमावली के अधिसूचित होने से आदिवासी समाज और स्थानीय ग्रामीणों में भारी उत्साह का माहौल है। 29 वर्षों के लंबे संघर्ष और बलिदान के बाद मिली इस संवैधानिक जीत को बरवाडीह प्रखंड के दलदलिया गांव में रविवार को विजय दिवस के रूप में मनाया गया। इस दौरान ग्राम सभाओं ने अपनी नई शक्तियों का शंखनाद किया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पेसा मामले के जानकर व सामाजिक कार्यकर्ता जेम्स हेरेंज ने कहा कि अब 5वीं अनुसूची वाले क्षेत्रों की ग्राम सभाओं को असीमित संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। अब ग्राम सभा के पास विधायी, कार्यपालिक और न्यायपालिका की शक्तियां होंगी।उन्होंने स्पष्ट किया कि जल, जंगल और जमीन के किसी भी अवैध दोहन या खनन पर अब ग्राम सभा सर्वसम्मति से निर्णय लेगी। यहां तक कि बेतला ब्याघ्र परियोजना जैसे क्षेत्रों में भी वन विभाग को कोई भी नई योजना शुरू करने से पहले ग्राम सभा की अनुमति लेनी अनिवार्य होगी। भारतीय सामुदायिक कार्यकर्त्ता संघ के राष्ट्रीय संयोजक अरविन्द मूर्ति ने कहा कि ग्राम सभाओं को सभी तरह के प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन का हक मिलना दुनिया के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। स्वशासन की प्रशासनिक बारीकियों पर चर्चा करते हुए मिथिलेश कुमार ने बताया कि अब प्रत्येक गांव में ग्राम सभा सचिवालय की स्थापना होगी। दस्तावेजों के संधारण के लिए गांव के ही सहायक सचिव का चयन किया जाएगा। ग्राम सभा का एक ही संवैधानिक रजिस्टर होगा, जिसमें दर्ज फैसले सभी सरकारी विभागों के लिए बाध्यकारी होंगे। जिप सदस्य कन्हाई सिंह ने कहा कि गांव में जन्म, मृत्यु और विवाह प्रमाण पत्र भी ग्राम सभा ही जारी करेगी। कार्यक्रम का संचालन सोमवती देवी ने किया। मौके पर दलदलिया के अलावे कर्रवाई, गोइंदी, लोहरगडा सहित अन्य ग्राम सभा के सदस्य समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुष व बच्चे मौजूद थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में ग्राम प्रधान राजू उरांव, संध्या देवी, निर्मल बृजिया, कमलेश सिंह, विमल तिग्गा, ग्राम स्वराज अभियान के विमल सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।उत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। अमिन्ता उरांव के पारंपरिक गीतों ने जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर केलसा नदी पर पाहन राजेश्वर सिंह के नेतृत्व में गांव गम्हेल की पारंपरिक रीति रिवाज से पूजा-पाठ की गई। इस दौरान ग्रामीणों ने जल, जंगल, जमीन को अवैध दोहन से बचाने व जल संरक्षण का संकल्प लिया।
