उत्तराखंड डेली न्यूज़: ब्योरो

उत्तराखंड के सहस्रधारा आपदा के पीछे बाल्दी नदी के रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हुआ अतिक्रमण एक बड़ी वजह है, जहां थेवा और चामासारी में नदी की जमीन को राजस्व रिकॉर्ड में खेती भूमि दिखाया।उत्तराखंड के सहस्रधारा में आई आपदा के पीछे रिजर्व फॉरेस्ट में अतिक्रमण बड़ी वजह है। लेकिन, इसकी जड़ें कहीं ज्यादा गहरी हैं। सहस्रधारा में बहने वाली बाल्दी नदी का बड़ा हिस्सा, जो रिजर्व फॉरेस्ट में आता है, उसे राजस्व रिकॉर्ड में भूमिधरी यानी खेती योग्य जमीन के रूप में दर्शाया गया है। यानी, जंगल की इस जमीन को खसरे बदलकर सीधे लोगों के नाम कर दिया गया।सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस गड़बड़ी को सुधारने के लिए कुछ समय पहले विभिन्न विभागों के संयुक्त सर्वे के बाद शासन को भेजी गई फाइल भी गुम है। पूर्व सर्वेयर सीपी डोभाल ने आरटीआई से मिली सूचनाओं के आधार पर वन विभाग से इसकी शिकायत की है। उन्होंने बताया कि राजस्व और वन विभाग के नक्शों में भारी विसंगति है। सहस्रधारा के थेवा और चामासारी इलाके में नदी किनारे की जमीन को राजस्व रिकॉर्ड में खेती योग्य भूमि के रूप में दिखाया गया है, जबकि वन विभाग के नक्शे और सर्वे ऑफ इंडिया के मानचित्र में यही क्षेत्र रिजर्व फॉरेस्ट और नदी के रूप में अंकित है। डोभाल के अनुसार, राजस्व के पुराने और नए फसली नक्शे में नदी का कोई अस्तित्व नहीं दिखता। जिस जगह नदी है, वहां नाम खेत दिखाए गए हैं। हैरानी की बात है कि नदी उससे ऊपर कारलीगाड़ और दूसरे गांवों के नक्शों में अंकित है। यानी नदी का बीच का हिस्सा राजस्व के नक्शे से गायब है। उनके अनुसार, यह गड़बड़ी लंबे समय से चली आ रही है। समय रहते इसे दुरुस्त कर लिया होता तो शायद इतनी तबाही न होती।नदी की जमीन पर हो चुके अवैध निर्माण, वन विभाग के पिलर गायब
डोभाल के मुताबिक, थेवा गांव में 230.26 एकड़ क्षेत्र आरक्षित वन है। लेकिन, राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में 219 एकड़ भूमि ही रिजर्व फॉरेस्ट के तौर पर दर्ज है। यानी 11.26 एकड़ (करीब 57 बीघा) आरक्षित वन भूमि रिकॉर्ड में नहीं है। इस जमीन पर अवैध निर्माण हो चुके हैं।
विभाग के पिलर भी गायब हैं।
डीएफओ-मसूरी अमित कंवर ने कहा कि 66 इस मामले में रिकॉर्ड मंगवाए जा रहे हैं, ताकि असल स्थिति का पता चल सके। रिकॉर्ड में गड़बड़ी है तो उसे सुधरवाया जाएगा। 57
संयुक्त निरीक्षण के बाद सिफारिश की फाइल गुम
कुछ महीने पहले राजस्व, वन विभाग, सर्वे और एमडीडीए के अफसरों ने मिलकर इस क्षेत्र का संयुक्त निरीक्षण किया था। इसके बाद छह बिंदुओं पर कार्रवाई की सिफारिश और बंदोबस्ती सुधार के लिए शासन को फाइल भेजी गई। लेकिन, अब वह फाइल भी गायब है। वन विभाग के एक बड़े अफसर ने दावा किया कि उन्होंने खुद इस फाइल का पता लगाने की कोशिश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
