उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
उत्तराखंड सरकार ने प्राकृतिक जलस्रोतों और वर्षा आधारित नदियों के पुनर्जीवन के लिए ₹5.19 करोड़ स्वीकृत किए हैं। पौड़ी जिले में पश्चिमी नयार और हिंवल नदी की सहायक नदियों के जलसमेट क्षेत्रों में जल संरक्षण और मृदा संरक्षण कार्य होंगे। नैनीताल में शिप्रा नदी की सहायक नदियों के लिए भी ऐसे ही कार्य किए जाएंगे। हल्द्वानी, कोटाबाग और रामनगर में भूजल रिचार्ज पर भी ध्यान दिया जाएगा।प्राकृतिक जलस्रोतों और वर्षा आधारित नदियों को पुनर्जीवन देने को सरकार गंभीरता से कदम उठा रही है। इस कड़ी में स्प्रिंग एंड रिवर रिज्युविनेशन प्राधिकरण (सारा) के अंतर्गत पौड़ी जिले की दो और नैनीताल की एक नदी की सहायक नदियों व जलसमेट क्षेत्रों में जल संरक्षण एवं हल्द्वानी, कोटाबाग व रामनगर में भूजल रिचार्ज के दृष्टिगत रिचार्ज शाफ्ट सबंधी कार्यों के लिए शासन ने 5.19 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।पौड़ी जिले में पश्चिमी नयार नदी की सहायक नदियों इरगाड, पैडुल, निशनी, स्यूल व रछुली के जल संग्रहण क्षेत्रों में जल संरक्षण, मृदा संरक्षण के कार्य किए जाएंगे।इसी जिले की हिंवल नदी के जलसमेट क्षेत्र में पेयजल योजनाओं में जल संवर्द्धन में बढ़ोतरी के उद्देश्य से विभिन्न कार्य किए जाएंगे। नैनीताल जिले में शिप्रा नदी की सहायक नदियों थुआ, कुलेती, उकिना व कुटियाखाल के जल समेट क्षेत्रों में भी जल संरक्षण के कार्य होंगे।उधर, गंगा सलाण विकास समिति के अध्यक्ष दिनेश भंडारी एवं महासचिव प्रदीप कुकरेती ने यमकेश्वर क्षेत्र के हिंवल नदी के जलसमेट क्षेत्रों में स्थित पेयजल योजनाओं में जल संवर्द्धन व नदी पुनरोद्धार के कार्यों की स्वीकृति देने के लिए सरकार के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया है। साथ ही सुझाव दिया है कि जलसमेट क्षेत्रों में वैज्ञानिक आधार पर कार्य किए जाएं।
