उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो

देहरादून के जौनसार बावर के कई गांवों में शादी समारोह जैसे आयोजनों को लेकर कई बड़े फैसले लिए गए.देहरादून जिले के जौनसार बावर क्षेत्र में समय-समय पर सामाजिक सुधार के फैसले लिए जाते रहे हैं. हाल ही अक्टूबर माह में विकासनगर-जौनसार बावर के कंदाड और इंद्रोली गांव के लोगों ने फैसला लिया था कि इन गांव की महिलाएं विवाह समारोह और मांगलिक कार्यों में गोल्ड की तीन ज्वैलरी ही पहन पाएंगी. इसी क्रम में अब खत पट्टी शैली के अंतर्गत गांव के लोगों ने महत्वपूर्ण सामाजिक निर्णय लिए गए हैं.देहरादून जिले के जौनसार बावर क्षेत्र अपनी अनूठी संस्कृति के लिए विश्व भर में अपनी पहचान रखता है. जनजाति समुदाय क्षेत्र में लोग सर्वसम्मति से समाज सुधार के फैसले समय-समय पर लेते रहते हैं, ताकि समाज के आखिरी पायदान पर खड़े परिवार को भी समाज के मुख्य धारा से जोड़ा जा सके. इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए 20 नवंबर को जौनबार बावर की खत पट्टी शैली में शामिल 1 दर्जन से अधिक गांव के लोगों की बैठक हुई. बैठक दोहा गांव में हुई, जिसकी अध्यक्षता गांव के सदर स्याणा (मुखिया) राजेंद्र सिंह ने की.बैठक में कई फैसले हुए जो कि सर्वसम्मति से लिए गए और ये फैसले खत पट्टी शैली के अंतर्गत सभी गांव में लागू होंगे. फैसलों के अनुसार, अब इन गांवों में होने वाली शादियां और अन्य शुभ आयोजन बेहद सादगी से होंगे. सामाजिक समानता के तहत शादियों और शुभ आयोजन में महंगे तोहफे न तो दिए जाएंगे और न ही लिए जाएंगे. इसके अलावा, न ही शराब और फास्ट फूड परोसा जाएगा. नियम का उल्लंघन करने पर परिवार पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा. साथ ही उन परिवार के किसी भी शुभ कार्यक्रम में गांव का कोई भी व्यक्ति शामिल नहीं होगा. महिलाएं शादी और रयणी भोज (शादीशुदा महिलाओं का भोज) में केवल तीन गहने ही पहन सकेंगी. इसमें नाक में फूली (नोज पिन), कान में झुमके, गले में मंगलसूत्र शामिल है.आगामी शादी समारोह या शुभ कार्यक्रम में शराब, फास्ट फूड जैसे चाऊमीन, मोमोज आदि पर प्रतिबंध रहेगा. शादी में मामा की ओर से बकरा, आटा, चावल दिया जाएगा. विवाहित बेटी की ओर से (ससुराल से मायके वालों को) बकरा देने की प्रथा पर पाबंदी रहेगी. रयणी भोज में मिठाई और फल दिए जा सकते हैं. चांदी का सिक्का, ड्राई फ्रूट्स और महंगे गिफ्ट नहीं दिए जाएंगे.इससे पूर्व अक्टूबर माह में ग्राम कदांड गांव में भी फैसला हुआ था कि शादी आदि आयोजनों में महिलाएं तीन गहने ही पहन सकेंगी. 20 नवंबर को खारसी गांव ने भी यह निर्णय लिया. और अब खत पट्टी शैली के सदर स्याणा की अध्यक्षता में सर्वसहमति से अन्य निर्णय भी लिए गए हैं.
