उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो
हल्द्वानी से अंतरिक्ष विज्ञान की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है, जहां उत्तराखंड में पहली बार छात्रों की सहभागिता से हाई-एल्टीट्यूड हीलियम बैलून के जरिए सैटेलाइट पेलोड को निकट अंतरिक्ष तक सफलतापूर्वक भेजा गया. इस शैक्षणिक मिशन में छात्रों द्वारा डिजाइन किए गए सैटेलाइट मॉडल ने वास्तविक उड़ान परिस्थितियों में अहम वैज्ञानिक डेटा एकत्र किया, जिसे उत्तर भारत का पहला ऐसा प्रयोगात्मक अभियान माना जा रहा है.नैनीताल: हल्द्वानी से अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक पहल सामने आई है. उत्तराखंड में पहली बार युवाओं और छात्रों की सहभागिता से हाई-एल्टीट्यूड हीलियम बैलून के जरिए एक सैटेलाइट पेलोड को सफलतापूर्वक निकट अंतरिक्ष (Near / Lower Space) तक भेजा गया. इसे उत्तर भारत का पहला ऐसा शैक्षणिक मिशन माना जा रहा है, जिसमें छात्रों द्वारा डिज़ाइन किए गए सैटेलाइट मॉडल को वास्तविक उड़ान परिस्थितियों में लॉन्च कर प्रत्यक्ष अनुसंधान का अवसर दिया गया.यह मिशन हल्द्वानी से लॉन्च किया गया, जहाँ हीलियम बैलून के साथ जुड़े सैटेलाइट पेलोड ने पृथ्वी की सतह से लगभग 7 से 10 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ान भरी. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ऊँचाई के साथ बदलते वायुमंडलीय हालातों का अध्ययन करना और वास्तविक परिस्थितियों में वैज्ञानिक डेटा एकत्र करना था. सैटेलाइट में लगे आधुनिक सेंसरों ने तापमान, वायुदाब और पर्यावरणीय बदलावों से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े रिकॉर्ड किए.प्रेक्षण के लिए रोकी गई उड़ानें,वैज्ञानिक प्रयोगों को और अधिक व्यापक बनाने के लिए सैटेलाइट पेलोड में जैविक नमूने भी शामिल किए गए. इनमें बीज, पत्तियाँ और पराग कण जैसे तत्व भेजे गए, ताकि यह समझा जा सके कि अधिक ऊंचाई और कम दाब वाले वातावरण में प्राकृतिक संरचनाएँ किस प्रकार प्रतिक्रिया करती हैं. यह प्रयोग भविष्य में अंतरिक्ष जीवविज्ञान और पर्यावरण अनुसंधान के लिए उपयोगी साबित हो सकता है. इस मिशन की सबसे अहम बात यह रही कि एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने इसके लिए विशेष रूप से एयरस्पेस क्लियर किया. सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और स्थानीय प्रशासन से आवश्यक अनुमतियां ली गईं. मिशन के दौरान कुछ उड़ानों के संचालन में अस्थायी बदलाव और विलंब भी किया गया, ताकि प्रक्षेपण पूरी तरह सुरक्षित ढंग से संपन्न हो सके.
