उत्तराखंड डेली न्यूज :ब्योरो
आज महंगे-महंगे साबुन-डिटर्जेंट भले ही आने लगे हैं, लेकिन आज भी हम जंगली फलों से ही घर के कपड़े धोते हैं. सिर्फ कपड़े ही नहीं हमारे यहां तो जूते भी इन्हीं फलों से चमकाए जाते हैं. दरअसल, चमड़े के जूते बनाने के लिए सबसे पहले चमड़ा को साफ किया जाता था. तब इस फल का इस्तेमाल होता था…मध्य प्रदेश के जंगलों में एक ऐसा फल मिलता है, जिससका उपयोग कपड़े धोने से लेकर चमड़ा साफ करने तक में किया जाता है. छतरपुर के ग्रामीण इलाकों में इन फलों से आज भी कपड़े साफ किए जाते हैं. दरअसल, छतरपुर के जंगली इलाकों में घोंट, इंगुआ (हिंगोट या इंगा) और रीठा नाम के पेड़ पाए जाते हैं. इन पेड़ों पर उगने वाले फलों की खासियत आज भी लोगों के लिए हैरानी का विषय बन जाती है.अगर आपके आसपास भी घोंट फल हो तो आप भी लाभ उठा सकते हैं. गांव के कालीचरण सोनी बताते हैं कि पहले जब साबुन-निरमा, डिटर्जेंट पाउडर नहीं चलते थे, तब हमारे यहां जंगली फलों की सहायता से कपड़े और चमड़ा साफ किया जाता था. ये फल हमारे आसपास ही मिल जाते थे. हालांकि, आज भी ये जंगली फल मिल जाते हैं. इन फलों की खास बात ये कि इन्हें सिर्फ जानवर ही नहीं खाते, बल्कि कपड़ों से लेकर चमड़ा तक साफ किया जाता है.महंगे साबुन-डिटर्जेंट से बेहतर ये फल,कालीचरण बताते हैं कि आज महंगे-महंगे साबुन-डिटर्जेंट भले ही आने लगे हैं, लेकिन आज भी हम जंगली फलों से ही घर के कपड़े धोते हैं. सिर्फ कपड़े ही नहीं हमारे यहां तो जूते भी इन्हीं फलों से चमकाए जाते हैं. दरअसल, चमड़े के जूते बनाने के लिए सबसे पहले चमड़ा को साफ किया जाता था. चमड़ा साफ करने के लिए आसपास ही ऐसे जंगली फल मिल जाते थे, जिनसे चमड़ा को आसानी से साफ कर लिया जाता था.क्या है घोंट फल? गोरे पाल बताते हैं कि हमारे गांव में ही जब मृत जानवरों का चमड़ा उतारा जाता था तो उसमें नमक लगाकर बरगा देते थे. इसे धूप में सुखाते थे. धूप में सूखने के दौरान नमक चमड़े की गंदगी को सोख लेता है. धूप में सूखने के बाद घोंट के पानी में सड़ाते थे. इस पानी में चमड़ा बिल्कुल साफ हो जाता था.घोंट फल की खासियत,गोरे बताते हैं कि घोंट फल एक जंगली पेड़ होता है, जिसे जानवर नहीं खाते हैं. इस फल की खासियत होती है कि यह पानी में घुलने पर झाग देता है. इसे एक नांद या हौज के पानी में डाल दिया जाता है और यह 1 से 2 दिन सड़ता है. इसके बाद इसमें कपड़े डाल दिए जाते हैं. इसमें इतना झाग होता है कि कपड़े को डालने पर ही चमचमा जाता है.
चमड़ा, कपड़ा होता था साफ
कालीचरण बताते हैं कि हमारे यहां ऐसे तमाम जंगली पेड़ हैं, जिनके फलों से गंदे से गंदे कपड़े साफ कर दिए जाते हैं. आप सोचिए जब चमड़ा साफ हो जाता है तो कपड़े तो सामान्य चीज है. घोंट फल से लेकर रीठा और इंगुआ जैसे फल आज भी जंगल हार में मिल जाते हैं. आज भी आप इनसे गंदे कपड़े साफ हो जाते हैं.
