उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो

चिन्यालीसौड़ और गौचर हवाई पट्टियां अब सेना के हवाले किए जाने से संवरेगी। इससे न सिर्फ चीन सीमा पर सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि चारधाम यात्रा भी संवरेगी। सरकार ने बुधवार को फैसला लिया।चिन्यालीसौड़ और गौचर हवाई पट्टियों के विकास का काम पिछले कई दशकों से चल रहा है। लेकिन अभी तक दोनों ही हवाई पट्टियों पर नियमित रूप से बड़े हवाई जाहजों का संचालन शुरू नहीं हो पाया है। अब सरकार ने यह हवाई पट्टियां सेना को देने का फैसला किया है। जिससे यहां सुविधाओं का विकास तेजी से होने की उम्मीद है। हवाई पिट्टियां सेना को मिलने से न केवल रनवे की समस्या दूर हो पाएगी बल्कि अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए बजट की सुविधा बढ़ जाएगी। यहां से सेना के साथ ही आम लोगों की हवाई उड़ान की जरूरतें पूरी होंगी। आपदा के समय राहत बचाव कार्यों में तेजी आएगी, हेली एंबुलेंस सेवाओं का भी संचालन हो सकेगा।बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण होगा,वायु सेना के पास हवाई पट्टियों के विकास के लिए बजट की कमी नहीं होती। जिससे यहां पर बुनियादी ढ़ांचे का विकास होगा। खासकर रनवे का विस्तार होने से इन हवाई पट्टियों पर बड़े मालवाहक विमान भी उतर पाएंगे। इससे स्थानीय लोगों के साथ ही चारधाम यात्रा के दौरान भी इन हवाई पट्टियों का उपयोग संभव हो पाएगा।
नाइट लैंडिंग की सुविधा विकसित होगी
गौचर और चिन्यालीसौड़ में अभी रात में विमान उतारना कठिन है। अब वायु सेना यहां आधुनिक लाइट सिस्टम और रडार लगाएगी, जिससे नाइट लैंडिंग सुविधा शुरू हो पाएगी और हवाई पट्टियों का उपयोग दिन के साथ ही रात के समय भी हो पाएगा। यहां पर विमानों के लिए रिफ्यूलिंग और मरम्मत की स्थायी व्यवस्था भी बनाई जाएगी।सामरिक दृष्टि से अहम दोनों हवाई पट्टियां,गौचर और चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टियां चीन सीमा के काफी करीब हैं। ऐसे में सेना इनका तेजी से विकास करेंगी। जिससे सीमा पर किसी भी आपात स्थिति में सेना और भारी मशीनरी को पहुंचाया जा सकेगा। इन क्षेत्रों से टोही विमानों और ड्रोन्स का संचालन होगा जिसके लिए निगरानी और संचार सुविधाओं का विकास जरूरी होगा। ऐसा होने से हवाई पट्टियों का संचालन और सफर दोनों सुरक्षित हो जाएगा।
