उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
देहरादून में भंडारी बाग रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के निर्माण से स्थानीय निवासियों को भारी परेशानी हो रही है। सर्विस रोड और नाले के निर्माण के कारण घरों और सड़क के बीच खतरनाक अंतर पैदा हो गया है, जिससे सुरक्षा जोखिम बढ़ गए हैं।विकास कार्यों के लिए कई बार हमें परेशानी भी झेलनी पड़ती है। लेकिन, विकास के नाम पर पूरी व्यवस्था को ही ध्वस्त कर देना सही नहीं। वर्ष 2021 से निर्माणाधीन भंडारी बाग रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) के काम मे भी ऐसा ही हो रहा है।भंडारी बाग के छोर पर आरओबी तो डेढ़ साल पहले आकार ले चुका था, लेकिन रेसकोर्स या रेस्ट कैंप के छोर पर सिर्फ पिलर खड़े थे। अब दूसरी तरफ भी एप्रोच रोड आकार लेने लगी है और नाले का निर्माण प्रगति पर है। लेकिन, काम मे नियमों की अनदेखी से स्थानीय नागरिकों की समस्या बढ़ गई है। स्थिति यह है कि बेतरतीब खोदाई से सड़क तो ऊबड़खाबड़ हुई ही है, घर से बाहर कदम रखना जान को जोखिम में डालने जैसा बन गया है। क्योंकि, घर के प्रवेश मार्ग और सड़क के बीच की जगह गड्ढों ने ले ली है।इतना ही नहीं नाला निर्माण के लिए की गई खोदाई वाले हिस्से पर सरिया निकले हुए हैं। नागरिकों के लिए घर से सड़क पर आने के लिए लोहे की पतली जाली या पतले पाइप डाले गए हैं। हल्का सा पैर फिसला नहीं कि हादसे का शिकार होना तय है। कुछ घर ऐसे भी है, जिनके लिए अस्थाई रैंप तक नहीं बनाए गए हैं। वहीं, आधा दर्जन के करीब दुकानें मार्ग न होने से करीब एक माह से बंद पड़ी हैं।मेरे घर के बाहर तो अस्थाई रैंप तक नहीं बनाया गया है। ऐसे में गड्ढे में बमुश्किल उतरकर जाना पड़ रहा है। नीचे नाले में सरिया भी खुले छोड़े गए हैं। लगता है कि आम नागरिकों की जान की किसी को परवाह ही नहीं है। यह स्थिति करीब महीनेभर से बनी हुई है। – भूपेंद्र सिंह, निवासी रेस्ट कैंप,मेरे घुटनों में दर्द रहता है और घर से बाहर निकलने के लिए बस एक पतली लोहे की जाली लगाई गई है। ऐसे में हर समय हादसे का खतरा बना रहता है। क्षेत्रीय विधायक और लोनिवि से मांग है कि जल्द नाला निर्माण पूरा कर व्यवस्था दुरुस्त की जाए। – विमला देवी, निवासी रेस्ट कैंप,किसी भी बड़ी परियोजना का निर्माण समयबद्ध तरीके से किया जाना चाहिए। क्योंकि बड़ी परियोजनाओं में खोदाई के कार्यों से स्थानीय निवासियों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। – अतुल जैन, स्थानीय निवासी
भंडारी बाग में रेलवे लाइन के ऊपर का लोहे का ढांचा हो रहा तैयार
लीशा कंपनी के साथ अगस्त 2025 में नया अनुबंध करते हुए लोक निर्माण विभाग ने धरातल पर काम की गति बढ़ाने के लिए चरणवार लक्ष्य निर्धारित किए। ताकि कार्य की प्रगति निरंतर जारी रहे। कंपनी को अवशेष कार्य को पूरा करने की दिशा में तीन माह के भीतर 25 प्रतिशत प्रगति हासिल करनी थी। छह माह में प्रगति 50 प्रतिशत, 09 माह में 75 प्रतिशत और 12 माह में काम पूरा करना होगा। हालांकि, रेलवे लाइन के ऊपर लोहे का पुल खड़ा किए जाने के इंतजार में प्रथम तीन माह की प्रगति पूरी होती नजर नहीं आई।
ख्वाब देखा 2013 में, शिलान्यास 2021 में और करना पड़ा लंबा इंतजार
भंडारीबाग रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) के निर्माण का ख्वाब वर्ष 2013 में देखा गया था, लेकिन इसका शिलान्यास वर्ष 2021 में किया जा सका। धरातल पर काम में आगे बढ़ाने में आरंभ से ही लेटलतीफी देखने को मिली। निर्माण कार्य 08 माह के विलंब से किया जा सका। जिसके चलते इसकी दो डेडलाइन मार्च 2023 और मार्च 2024 में ही बीत चुकी थी। अभी तक सिर्फ भंडारी बाग के छोर पर आरोओबी आकार ले सका है। रेसकोर्स के छोर पर अभी सिर्फ पिलर ही खड़े हैं। हालांकि, अब धरातल पर काम रफ्तार पकड़ता दिख रहा है।
