उत्तराखंड डेली न्यूज़: ब्योरो

वैज्ञानिकों के अनुसार, वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे भविष्य में जल संकट का खतरा बढ़ रहा है।हिमालय को ‘तीसरा ध्रुव’ कहा जाता है, क्योंकि उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव के बाद यह सबसे बड़ा हिमनद (ग्लेशियर) क्षेत्र है। दक्षिण एशिया के सात देशों के करीब 75 करोड़ लोगों की जलापूर्ति सीधे हिमालय पर निर्भर करती है। लेकिन, वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन ने इस जीवनदायिनी पर्वत शृंखला पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।
