उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
महिला सिपाही से जुड़े फ्रॉड मामले में कोर्ट ने कहा कि किसी भी मां-बाप के लिए पहला धर्म बेटी की जान बचाना है। समय पर बिल न देना महज एक विभागीय अनियमितता हो सकती है, अपराध नहीं।बेटी के दिल के ऑपरेशन के लिए विभाग से ली गई एडवांस रकम को गबन बताने और फर्जी दस्तावेज को लेकर धोखाधड़ी के केस में अदालत ने महिला सिपाही को बड़ी राहत दी है। अदालत ने न सिर्फ महिला सिपाही को आरोपमुक्त किया, बल्कि टिप्पणी की कि किसी भी माता-पिता की प्राथमिकता अपनी संतान को बचाना है, न कि बिल बाउचर जुटाना।प्रथम अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संजीव कुमार की अदालत ने सबूतों के अभाव और विवेचना में खामियों को देखते हुए महिला सिपाही सुनीता को बरी कर दिया है । अदालत ने अपने अहम फैसले में टिप्पणी भी की। अदालत ने कहा कि समय पर बिल न देना महज एक विभागीय अनियमितता हो सकती है, अपराध नहीं।
