उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
उत्तराखंड के प्रमुख क्षेत्रीय धार्मिक एवं सामाजिक संगठन ‘भैरव सेना संगठन’ द्वारा देवभूमि की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मर्यादा की रक्षा हेतु छेड़ा गया अभियान अब सफलता की ओर अग्रसर है। संगठन द्वारा लंबे समय से की जा रही ‘पंचगव्य आचमन’ की मांग पर शासन-प्रशासन ने गंभीर संज्ञान लिया है। भैरव सेना संगठन के निरंतर दबाव और तर्कों के फलस्वरूप, शासन की महत्वपूर्ण समितियों ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले पवित्र स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने हेतु अपनी सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। इस निर्णय के अंतर्गत, तीर्थों की शुचिता बनाए रखने के लिए आगंतुकों का पंचगव्य के माध्यम से आध्यात्मिक-धार्मिक शुद्धिकरण अनिवार्य करने की घोषणा की गई है।इस अभियान और संबंधित कार्यक्रम का शुभारंभ टिहरी राज परिवार के ठाकुर भवानी प्रताप सिंह द्वारा किया गया, जिन्होंने देवभूमि की परंपराओं के संरक्षण पर बल दिया। कार्यक्रम में भाजपा चकशाहनगर पार्षद राकेश पंडित, स्वामी दर्शन भारती, मनोज ध्यानी जैसे प्रमुख समाजसेवियों एवं धर्मप्रेमियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर इस मुहिम को अपना पूर्ण समर्थन दिया।शासनादेश की आवश्यकता: समितियों की सैद्धांतिक स्वीकृति को तत्काल प्रभाव से ‘शासनादेश’ में परिवर्तित किया जाए, ताकि यह पूरे प्रदेश में कानूनी रूप से प्रभावी हो सके।मर्यादा की रक्षा: देवभूमि उत्तराखंड की पहचान यहाँ के मंदिर और परंपराएं हैं। भैरव सेना संगठन का मानना है कि पंचगव्य आचमन से न केवल धार्मिक मर्यादा सुनिश्चित होगी, बल्कि असामाजिक तत्वों के प्रवेश पर भी रोक लगेगी।संगठन शासन को आगाह करता है कि घोषणा और धरातल पर क्रियान्वयन के बीच की दूरी को शीघ्र समाप्त किया जाए।”देवभूमि के मंदिरों की पवित्रता से खिलवाड़ अब स्वीकार्य नहीं है। शासन की समितियों ने पंचगव्य आचमन की हमारी मांग को मानकर सही दिशा में कदम उठाया है। अब सरकार को बिना किसी राजनीतिक दबाव के इसे तुरंत ‘शासनादेश’ के रूप में लागू करना चाहिए। भैरव सेना संगठन तब तक चैन से नहीं बैठेगा जब तक इसे आधिकारिक रूप से लागू नहीं कर दिया जाता।”
भैरव सेना संगठन समस्त सनातनी समाज से आह्वान करता है कि वे अपनी गौरवशाली परंपराओं की रक्षा के लिए एकजुट रहें।
