उत्तराखंड डेली न्यूज: ब्योरो
भारतीय घरों में एक आम धारणा है कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर को कम भोजन की जरूरत होती है. भारी परांठे की जगह खिचड़ी और चाय-टोस्ट ले लेते हैं. लेकिन इस वर्ल्ड प्रोटीन डे पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक गंभीर चेतावनी दी है. जैसे-जैसे शरीर की उम्र बढ़ती है, उसे पहले से अधिक प्रोटीन की जरूरत होती है, कम नहीं.
एनाबॉलिक रेजिस्टेंस: क्यों बढ़ती उम्र में प्रोटीन है जरूरी?
‘ब्रिटिश जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन’ के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ हमारा शरीर प्रोटीन को प्रोसेस करने में कम कुशल हो जाता है. इसे वैज्ञानिक भाषा में “एनाबॉलिक रेजिस्टेंस” कहते हैं. इसका मतलब है कि 40 की उम्र वाली फुर्ती बनाए रखने के लिए एक 60 वर्षीय व्यक्ति को अपनी डाइट में प्रोटीन की मात्रा बढ़ानी चाहिए.
भारत में सारकोपेनिया (Sarcopenia) का खतरा
‘जर्नल ऑफ मिड-लाइफ हेल्थ’ (2025) के अध्ययन बताते हैं कि भारत में बुजुर्ग तेजी से सारकोपेनिया का शिकार हो रहे हैं। यह मांसपेशियों और उनकी ताकत में होने वाली प्रगतिशील कमी है. ग्रामीण इलाकों में 14.8% और शहरों में लगभग 7% बुजुर्ग इससे प्रभावित हैं. मांसपेशियों की कमी से चलने-फिरने में दिक्कत, गिरने का डर और चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है. ICMR के अनुसार, 80% भारतीय घरों में जरूरत से कम प्रोटीन का सेवन किया जा रहा है.
कितना प्रोटीन है काफी? (ICMR-NIN 2024 गाइडलाइंस)
ICMR-NIN की नई गाइडलाइंस के अनुसार वरिष्ठ नागरिकों को अपनी शारीरिक स्थिति के आधार पर प्रोटीन लेना चाहिए. शरीर के प्रति किलो वजन पर 1.0 से 1.2 ग्राम प्रोटीन. (उदा. 60 किलो वजन = 60-72 ग्राम प्रोटीन रोज). प्रति किलो वजन पर 1.2 से 1.5 ग्राम प्रोटीन.
दाल-चावल का जाल: गुणवत्ता पर ध्यान दें
भारतीय आहार में अनाज (रोटी-चावल) अधिक होता है, जिसमें जरूरी अमीनो एसिड जैसे ‘ल्यूसीन’ (Leucine) की कमी होती है. ल्यूसीन मांसपेशियों के निर्माण का “स्विच” है. अनाज और दालों का अनुपात 3:1 रखें. गाढ़ा दही, पनीर (50 ग्राम), अंडे, सोया, स्प्राउट्स और बिना चर्बी वाला मांस (मछली या चिकन).
वितरण का नियम (Distribution Rule)
हम अक्सर रात के खाने में ज्यादा प्रोटीन लेते हैं, जो गलत है. हमारा शरीर एक बार में केवल 25-30 ग्राम प्रोटीन ही पचा सकता है. इसलिए, प्रोटीन को पूरे दिन के भोजन (नाश्ता, दोपहर और रात का खाना) में बराबर बांटें (जैसे 20 ग्राम – 20 ग्राम – 20 ग्राम).
